राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से इस्कॉन को असमय रथयात्रा निकालने से रोकने में हस्तक्षेप की मांग
नरेश
- 07 Jul 2026, 03:55 PM
- Updated: 03:55 PM
भुवनेश्वर, सात जुलाई (भाषा) गजपति महाराजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (एसजेटीएमसी) के अध्यक्ष दिब्यसिंह देब ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे इस्कॉन को दुनियाभर में भगवान जगन्नाथ की 'स्नान यात्रा' और रथ यात्रा परंपरा से हटते हुए असमय आयोजित करने से रोकने के लिए हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।
पुरी के राजा देब ने कहा, ''कई बार अनुरोध करने के बावजूद, इस्कॉन भगवान जगन्नाथ के त्योहार मनाते समय पवित्र धर्मग्रंथों के नियमों और सदियों पुरानी परंपराओं से हटकर काम कर रहा है।''
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (एसजेटीएमसी) ओडिशा के पुरी में स्थित 12वीं सदी के इस मंदिर की सबसे बड़ी नीति-निर्धारक संस्था है।
चार जुलाई को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में देब ने कहा, ''मैं यह बताना चाहता हूं कि पिछले लगभग दो दशकों में, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (पुरी) ने इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए लगातार कोशिशें की हैं और ओडिशा सरकार ने भी समय-समय पर इस बारे में सार्वजनिक बयान दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद दूसरे देशों में इस्कॉन द्वारा असमय आयोजित की जाने वाली श्री जगन्नाथ यात्राओं को रोका नहीं जा सका है।''
देब, जिन्हें भगवान जगन्नाथ का पहला सेवायत भी माना जाता है, ने कहा कि इन हालात में और दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ की परंपरा की पवित्रता बनाए रखने और भारत व विदेशों में अनगिनत भक्तों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए, उन्होंने एक बार फिर प्रधानमंत्री से उचित कदम उठाने की अपील की है कि इस्कॉन द्वारा पवित्र धर्मग्रंथों और परंपरा का उल्लंघन करके गलत समय पर आयोजित की जा रही स्नान-यात्रा और रथ यात्रा को रोका जाए।
इससे पहले, देब ने 24 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी और 20 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र लिखा था।
श्री जगन्नाथ संस्कृति पर शोध करने वाले विद्वान प्रो. हरेकृष्ण सत्पथी ने कहा, ''इसलिए, एसजेटीएमसी ने दिल्ली एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों से मिलेगा और उन्हें श्री जगन्नाथ संस्कृति की पवित्रता बनाए रखने के महत्व के बारे में बताएगा।''
देब ने माना कि सिर्फ ओडिशा सरकार और जगन्नाथ मंदिर प्रशासन इस्कॉन को भारत के बाहर असमय पर रथ यात्रा निकालने से नहीं रोक सकते। उन्होंने कहा, ''हमने ओडिशा के मुख्यमंत्री, कानून मंत्री, सांसदों और विधायकों के साथ मिलकर इस मामले को उठाने और पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा को बनाए रखने के लिए बात की है।''
भगवान जगन्नाथ की पवित्रता और शुद्धता को हर हाल में बनाए रखने पर जोर देते हुए गजपति महाराजा ने कहा, ''इस्कॉन का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय पश्चिम बंगाल के मायापुरी में है। वहां जो भी फैसला लिया जाता है, उसका पालन पूरी दुनिया में होता है। अब बदले हुए हालात में, पश्चिम बंगाल में सरकार बदल गई है और इस्कॉन को नया प्रमुख मिला है। इसलिए, हमें उन्हें सनातन धर्म के नियमों का पालन करने और भगवान जगन्नाथ से जुड़े अनुष्ठान गलत समय पर न करने के लिए मनाना चाहिए।''
पत्र में देब ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा 'ज्येष्ठ पूर्णिमा' को और रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया से नौ दिन के भीतर होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ''हालांकि इस्कॉन भारत में इन दिनों का पालन करता है, लेकिन देश भर में उनकी ज़्यादातर रथ यात्राएं गलत समय पर आयोजित की जाती हैं।''
जब उनसे पूछा गया कि भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा किसी और दिन आयोजित करने में क्या बुराई है, तो देब ने कहा, ''स्नान यात्रा भगवान का जन्मदिन है। कोई जन्मदिन कैसे बदल सकता है? क्या आप क्रिसमस या पैगंबर मोहम्मद की जयंती किसी और दिन मना सकते हैं?''
रथ यात्रा के बारे में उन्होंने बताया कि इस्कॉन से यह नहीं कहा जा रहा है कि वे रथ यात्रा किसी खास दिन ही निकालें। उन्होंने कहा, ''रथ यात्रा निकालने के लिए आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से नौ दिनों का समय होता है। लेकिन वे इसे अपनी मर्जी से किसी भी दिन आयोजित कर रहे हैं। इसे रोका जाना चाहिए और भगवान के अनुष्ठान शास्त्रों और श्री जगन्नाथ संस्कृति की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार ही होने चाहिए।''
भाषा वैभव नरेश
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