चढ़ावा विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठकें हुईं
जोहेब
- 08 Jul 2026, 09:21 PM
- Updated: 09:21 PM
अयोध्या (उत्तर प्रदेश), आठ जुलाई (भाषा) राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी जांच के बीच बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने अयोध्या में कई बैठकें कीं। ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इससे कुछ दिन पहले ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक के बाद हुई थी, जिसमें पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के नैतिक आधार पर दिए गए इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए थे।
अधिकारियों ने बताया कि विवाद के बाद ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव करने का भी फैसला किया है, जिसमें एक पेशेवर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति भी शामिल है।
ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, गोविंद देव गिरि ने ट्रस्ट कार्यालय में चंपत राय से मुलाकात की और करीब एक घंटे तक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
यह बैठक चंपत राय द्वारा मंगलवार को श्रद्धालुओं के नाम लिखे गए पत्र के बाद हुई। पत्र में उन्होंने कहा था कि एसआईटी के जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट सौंपने के बाद ही वह सभी आरोपों का जवाब देंगे।
उन्होंने यह भी लिखा कि तब तक उन्होंने मौन धारण किया है।
राय ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अफवाहों या अटकलों पर आधारित खबरों से गुमराह न हों।
सूत्रों के अनुसार, बाद में सामने आए उनके हस्ताक्षरित बयान में चंपत राय ने मंदिर की दान राशि की गिनती की प्रक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि बैंक ने नकदी गिनने के लिए एक निजी एजेंसी की सेवाएं ली थीं और कथित चोरी ट्रस्ट की प्रत्यक्ष निगरानी में नहीं, बल्कि उसी प्रक्रिया के दौरान हुई।
गिरि ने सार्वजनिक रूप से चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उनकी नजर में राय की छवि अब भी बेदाग है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राय ने लंबे समय तक गलत लोगों पर भरोसा किया, जिससे कथित गबन का पता नहीं चल सका।
सूत्रों के मुताबिक, दिन में बाद में अयोध्या के संतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी गिरि से मुलाकात की। बैठक में ट्रस्ट के हालिया घटनाक्रम, एसआईटी जांच और मंदिर प्रशासन की आगे की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
गिरि ने ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से भी मुलाकात की। गोपाल राव ने कहा कि फिलहाल उन्हें ट्रस्ट की कार्यवाही से दूर रहने के लिए कहा गया है, लेकिन वह अब भी ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं।
ये सभी बैठकें ऐसे समय में हुईं, जब एसआईटी मंदिर के दान पात्रों से श्रद्धालुओं की दी हुई दान राशि को कथित तौर पर दूसरी जगह भेजे जाने के मामले की जांच कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि जांच अब केवल संविदा कर्मचारियों द्वारा कथित चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और खर्चों की भी जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा एक पेशेवर सीईओ की नियुक्ति समेत प्रशासनिक सुधारों से जुड़े सुझावों पर भी विचार किया जा रहा है।
भाषा सं जफर जोहेब
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