जौहर विवि में तोड़-फोड़ के फ़ैसले पर पुन:विचार करें: नागरिक संस्था की योगी आदित्यनाथ से अपील
पवनेश
- 18 Jul 2026, 03:27 PM
- Updated: 03:27 PM
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर एक नागरिक संस्था ने रामपुर में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
'सिटिजन्स फॉर फ्रैटर्निटी - भारत' (सीएफएफ-भारत) ने अपने पत्र में मोहम्मद अली जौहर विवि की 38 इमारतों को गिराने की प्रस्तावित योजना के बारे में आई खबरों पर गहरी चिंता जताई है।
पत्र में कहा गया, "हम कानून के शासन का पूरा सम्मान करते हैं और मानते हैं कि सभी संस्थानों को कानूनी जरूरतों का पालन करना चाहिए, लेकिन हम विनम्रतापूर्वक अपील करते हैं कि किसी भी शिक्षण संस्थान पर असर डालने वाली कार्रवाई प्राकृतिक न्याय, आनुपातिकता और व्यापक जनहित के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए।"
पत्र पर दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व राजनयिक अशोक शर्मा, उद्योगपति सईद मुस्तफा शेरवानी, वरिष्ठ कारोबारी नेता नवेद खान और पत्रकार जावेद एम. अंसारी समेत कई लोगों के हस्ताक्षर किये हैं।
पत्र में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी सिर्फ इमारतों का समूह नहीं है; यह एक शिक्षण केंद्र है जो हज़ारों छात्रों को शिक्षा उपलब्ध कराता है और देश के बौद्धिक और सामाजिक विकास में योगदान देता है।
इसमें कहा गया है कि ऐसा कोई भी कदम जो छात्रों की शिक्षा और भविष्य में बाधा डाल सकता है, उस पर सावधानीपूर्वक पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
पत्र में कहा गया, "अगर कोई कानूनी या नियामक संबंधी उल्लंघन होता है, तो हम सम्मानपूर्वक अनुरोध करते हैं कि कोई भी ऐसा कदम उठाने से पहले, जिसे बदला न जा सके, सभी उपलब्ध कानूनी उपायों, सुधार के मौकों और न्यायिक प्रक्रियाओं का पूरा इस्तेमाल किया जाए। इससे कानून के शासन और निष्पक्षता व न्याय के संवैधानिक मूल्यों, दोनों को बनाए रखा जा सकेगा।"
इसमें कहा गया, "भाईचारे, बातचीत और राष्ट्रीय सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध संगठन के तौर पर, सीएफएफ-भारत आपकी सरकार से ईमानदारी से अपील करता है कि वह एक संवेदनशील और संतुलित दृष्टिकोण अपनाए, जो कानून का पालन सुनिश्चित करते हुए छात्रों के हितों की रक्षा करे।"
रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने जेल में बंद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की मोहम्मद अली जौहर विवि की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया। प्राधिकरण का कहना है कि ये इमारतें भवन योजना की मंजूरी के बिना बनाई गई थीं। विवि का तर्क है कि जब ये इमारतें बनाई गई थीं, तब यह इलाका आरडीए के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था।
प्राधिकरण ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि निर्माण के समय सक्षम अधिकारी से मंजूरी लेना अनिवार्य था।
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