सरकार को अलग-अलग आरोपियों के लिए अलग-अलग मानदंडों की अनुमति नहीं मिल सकती: न्यायालय
नेत्रपाल पवनेश
- 20 Nov 2024, 08:20 PM
- Updated: 08:20 PM
नयी दिल्ली, 20 नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में दर्ज एक आपराधिक मामले में एक व्यक्ति को जमानत देते हुए कहा कि राज्य सरकार को अलग-अलग आरोपियों के लिए अलग-अलग मानदंड लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इसने कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में चार अन्य सह-आरोपियों को अग्रिम जमानत देने के आदेश को चुनौती नहीं दी, जबकि न्यायालय ने इस संबंध में सुझाव दिया था।
न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने कहा, ‘‘दूसरी ओर, राज्य सरकार एक आरोपी की जमानत याचिका का विरोध कर रही है, जो करीब एक साल एवं दो महीने से जेल में बंद है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘राज्य सरकार को अलग-अलग आरोपियों के लिए अलग-अलग मानदंड लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।’’
शीर्ष अदालत एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रही थी, जिसने अक्टूबर 2023 में दर्ज मामले में नियमित जमानत का आग्रह करने वाली अपनी अर्जी को खारिज करने संबंधी कलकत्ता उच्च न्यायालय के इस साल जुलाई में आए आदेश को चुनौती दी थी।
पीठ ने कहा कि इस मामले में 19 सितंबर को पारित आदेश में उसने कहा था कि एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामलों में अग्रिम जमानत देना एक बहुत गंभीर मुद्दा है।
इसने कहा कि इसलिए अदालत ने राज्य सरकार को यह विचार करने का निर्देश दिया था कि क्या वह अन्य चार सह-आरोपियों को दी गई जमानत रद्द करने के लिए आवेदन दायर करने की मंशा रखती है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि राज्य सरकार चार सह-आरोपियों को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देने का प्रस्ताव नहीं रखती।
याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता एनडीपीएस अधिनियम से संबंधित गंभीर अपराध में संलिप्त था।
पीठ ने मौखिक रूप से कहा, ‘‘चीजें स्पष्ट हैं, यह सब मिलीभगत से हो रहा था।’’
इसने याचिका का निपटारा करते हुए अपने आदेश में कहा, ‘‘इस मामले को देखते हुए हम आवेदन स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। याचिकाकर्ता को निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।’’
न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने इस आधार पर नियमित जमानत का अनुरोध किया था कि चार अन्य आरोपियों को पहले ही अग्रिम जमानत का लाभ दिया जा चुका है।
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