रेणुकास्वामी हत्याकांड मामले की सुनवाई में तेजी लाए बेंगलुरु की अदालत : उच्चतम न्यायालय
अविनाश
- 15 May 2026, 04:21 PM
- Updated: 04:21 PM
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अभिनेता दर्शन और अन्य आरोपियों से जुड़े रेणुकास्वामी हत्याकांड मामले में बेंगलुरु की एक अदालत को सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश देते हुए शुक्रवार को कहा कि अब तक मामले की प्रगति ''बहुत धीमी'' रही है।
न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने कर्नाटक सरकार को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि दर्शन को वे सभी जेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिनका एक विचाराधीन कैदी हकदार होता है।
शीर्ष अदालत ने बेंगलुरु के सिविल एवं सत्र न्यायाधीश की रिपोर्ट का भी अवलोकन किया, जिसमें बताया गया कि मामले में तीन नवंबर 2025 को आरोप तय किए गए थे।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पिछले सात महीनों में अभियोजन पक्ष केवल 10 गवाहों से जिरह कर पाया है, जबकि वह प्राथमिकता के आधार पर 60 ऐसे गवाहों से पूछताछ करना चाहता है, जो आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पीठ ने कहा, ''हमारा मानना है कि मुकदमे की अब तक की प्रगति बहुत धीमी है। यह सही है कि बचाव पक्ष के वकील जिरह के लिए समय ले रहे हैं।''
शीर्ष अदालत ने कहा, ''लेकिन यदि सुनवाई इसी गति से चलती रही, तो केवल 60 गवाहों के बयान दर्ज करने में ही बहुत लंबा समय लग जाएगा। ऐसी स्थिति में निचली अदालत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गवाहों से नियमित रूप से पूछताछ हो और मामूली आधार पर स्थगन न दिया जाए।''
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जरूरत पड़ने पर निचली अदालत मामले की सुनवाई रोजाना भी कर सकती है।
पीठ ने कहा, ''हम एक वर्ष तक मुकदमे की प्रगति पर नजर रखना चाहते हैं। एक साल बाद यदि सुनवाई में कोई ठोस प्रगति नहीं होती है, तो हम मामले पर आगे विचार करेंगे।''
पीठ ने कहा, ''हम चाहते हैं कि बचाव पक्ष निचली अदालत के साथ सहयोग करे और यह सुनिश्चित करे कि गवाहों से यथाशीघ्र पूछताछ की जाए।''
दर्शन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि अभियोजन पक्ष 272 गवाहों से पूछताछ करना चाहता है और पिछले सात महीनों में केवल 10 गवाहों के बयान दर्ज हो सके हैं।
रोहतगी ने यह दलील भी दी कि अभिनेता को पृथक कोठरी में रखा गया है और उन्हें अन्य कैदियों से मिलने-जुलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
इस मामले में राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि दर्शन को उस स्थान पर रखा गया है, जिसे कोविड-19 महामारी के दौरान पृथक कोठरी कहा जाता था। उन्होंने इस दावे का भी खंडन किया कि अभिनेता को अन्य कैदियों से मिलने नहीं दिया जा रहा।
उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले दर्शन की एक याचिका पर कर्नाटक सरकार से रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें अभिनेता ने बुनियादी सुविधाएं नहीं दिए जाने का आरोप लगाया था।
शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष 14 अगस्त को दर्शन और मामले के अन्य आरोपियों को दी गई जमानत रद्द कर दी थी।
दर्शन, अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और कई अन्य लोगों पर 33 वर्षीय रेणुकास्वामी का अपहरण और यातना देने का आरोप है। रेणुकास्वामी पर आरोप था कि उसने पवित्रा को अश्लील संदेश भेजे थे।
पुलिस के अनुसार रेणुकास्वामी को जून 2024 में बेंगलुरु के एक शेड में तीन दिनों तक बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं। बाद में उसका शव एक नाले से बरामद किया गया।
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