नीट स्नातक मामला: एनटीए से जुड़े लोक सेवक की भूमिका की जांच कर रही है सीबीआई
प्रशांत
- 17 May 2026, 01:08 AM
- Updated: 01:08 AM
नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) नीट-स्नातक परीक्षा के पेपर लीक मामले में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े एक सरकारी कर्मचारी की कथित भूमिका केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के दायरे में आ गई है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
एजेंसी ने 14 मई को गिरफ्तार की गई आरोपी मनीषा संजय वाघमारे और उसके अगले दिन गिरफ्तार किए गए रसायन विज्ञान के व्याख्याता पी.वी. कुलकर्णी की हिरासत मांगते हुए अपना मामला प्रस्तुत किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि वाघमारे ने अन्य आरोपी व्यक्ति और "एनटीए से जुड़े लोक सेवक के साथ मिलकर" 27 अप्रैल को प्रश्न पत्र और उत्तर प्राप्त किए थे।
एजेंसी का आरोप है कि वाघमारे, जीव विज्ञान की व्याख्याता मनीषा मंधारे के माध्यम से कुलकर्णी को जानते थे। मनीषा मंधारे को सीबीआई ने शनिवार को गिरफ्तार किया।
एजेंसी का आरोप है कि वाघमारे ने कथित तौर पर कुलकर्णी से प्रश्न एकत्र किए और उन्हें अहिल्यानगर से गिरफ्तार किए गए एक अन्य आरोपी धनंजय लोखंडे और अन्य आरोपियों को मौद्रिक लाभ के बदले में उपलब्ध कराया।
लोखंडे पर प्रश्नों को वितरित करने का आरोप है।
उन्होंने बताया कि रसायन विज्ञान के हस्तलिखित प्रश्न, जिन्हें कुलकर्णी ने उम्मीदवारों के साथ साझा किया था, नष्ट कर दिए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि वाघमारे ने तीन मई को परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रश्नपत्र नष्ट कर दिए थे।
सीबीआई ने जीव विज्ञान के व्याख्याता मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया है, जो 3 मई को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-स्नातक के लिए एनटीए की प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति के सदस्य थे।
उन्होंने बताया कि कथित मुख्य आरोपी कुलकर्णी और अन्य आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह गिरफ्तारी की गई है।
उन्होंने बताया कि एजेंसी के मुख्यालय में पूछताछ के बाद मंधारे को यहां गिरफ्तार किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि वह कथित तौर पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) से जुड़ी परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थीं और एनटीए द्वारा विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त की गई थीं।
अधिकारियों ने बताया कि मंधारे के पास वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान के प्रश्नपत्रों तक पूरी पहुंच थी।
आरोप है कि मंधारे ने पुणे की मनीषा वाघमारे (जिन्हें 14 मई को गिरफ्तार किया गया था) के माध्यम से अप्रैल 2026 में नीट के संभावित अभ्यर्थियों को जुटाया और पुणे स्थित उनके आवास पर इन अभ्यर्थियों के लिए विशेष कोचिंग कक्षाएं आयोजित की गईं।
आरोप है कि मंधारे ने लीक हुए प्रश्न और उनके उत्तर चुनिंदा छात्रों को लिखवाए और इसके बदले में लाखों रुपये शुल्क के रूप में वसूले।
इनमें से अधिकांश प्रश्न तीन मई को आयोजित परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते थे। प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद तीन मई को आयोजित नीट-यूजी को रद्द कर दिया गया।
सीबीआई ने शुक्रवार को लातूर से रसायन विज्ञान के विशेषज्ञ प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया। कुलकर्णी कई वर्ष से नीट के प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समितियों में कार्यरत थे।
गोपनीय सामग्री तक अपनी विशेष पहुंच का फायदा उठाते हुए कुलकर्णी ने कथित तौर पर अप्रैल के अंतिम सप्ताह में अपने घर पर विशेष कोचिंग कक्षाएं आयोजित कीं और अपने छात्रों को वे प्रश्न और उत्तर लिखवाए जो तीन मई को आयोजित नीट-यूजी में पूछे गए थे।
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ''अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह के दौरान उन्होंने एक अन्य आरोपी मनीषा वाघमारे की मदद से छात्रों को संगठित किया, जिसे सीबीआई ने 14 मई को गिरफ्तार किया था।''
प्रवक्ता ने बताया कि छात्रों ने कथित तौर पर कोचिंग कक्षाओं में भाग लेने के लिए कई लाख रुपये का भुगतान किया, जहां उन्होंने प्रश्नों को अपनी नोटबुक में लिखा और बाद में तीन मई को आयोजित वास्तविक नीट-यूजी में हूबहू वही प्रश्न आए।
केंद्रीय एजेंसी ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है और कथित प्रनश्नपत्र लीक मामले की जांच के लिए टीमें गठित की हैं।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-स्नातक भारत के 551 शहरों और विदेशों में 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी।
देश भर में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित इस परीक्षा के लिए लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था।
एनटीए के अनुसार, परीक्षा आयोजित होने के चार दिन बाद सात मई की शाम को कथित अनियमितताओं की सूचना प्राप्त हुई।
एनटीए ने बताया कि स्वतंत्र सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई के लिए अगली सुबह ही यह सूचना केंद्रीय एजेंसियों को भेज दी गई थी।
भाषा प्रशांत प्रचेता
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