वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस फिर मुस्लिम लीग के आगे झुक गई: भाजपा
मनीषा
- 02 Jun 2026, 01:22 PM
- Updated: 01:22 PM
नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् पर कांग्रेस नेता शशि थरूर की टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस केरल में उस मुस्लिम लीग के आगे एक बार फिर ''झुक'' गई है जो सत्तारूढ़ गठबंधन में उसकी सहयोगी है।
थरूर ने आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत में वंदे मातरम् के सभी पांच अंतरे गाए जाने की जरूरत पर सवाल उठाया था। उन्होंने इस चलन को ''अनावश्यक रूप से थोपा गया'' बताया था।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने थरूर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पूरे वंदे मातरम् के गायन का विरोध कर राष्ट्रीय सम्मान के प्रति अनादर दिखाया है।
पूनावाला ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, ''कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वह राष्ट्रीय सम्मान के खिलाफ है। उसने पूर्ण वंदे मातरम् के गायन का विरोध किया है। शशि थरूर कहते हैं कि सभी अंतरों को गाना अनावश्यक रूप से थोपा जाना है। वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण में छह अंतरे हैं और फिर भी आप इसे अनावश्यक थोपना बता रहे हैं।''
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वही मानसिकता दिखाई है, जिसके कारण अतीत में राष्ट्रगीत को दो अंतरों तक सीमित कर दिया गया था।
पूनावाला ने कहा, ''यह वही मानसिकता दर्शाता है जिसके तहत (देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल) नेहरू ने वंदे मातरम् को दो अंतरों तक सीमित कर दिया था। जब इसे दो अंतरों तक सीमित किया गया था, तब भी कांग्रेस नेताओं को विरोध का सामना करना पड़ा था। आरिफ मसूद, समाजवादी पार्टी के अबू आजमी और अन्य नेताओं ने कहा था कि वे दो अंतरे भी स्वीकार्य नहीं हैं।''
पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस गीत का विरोध करने वाले वर्गों के दबाव के आगे अतीत में भी झुक गई थी और केरल में मुस्लिम लीग से अपने संबंधों के कारण वह अब भी ऐसा कर रही है।
उन्होंने कहा, ''नेहरू ने जिन्ना के दबाव में यह किया था। उस समय उन्होंने यह कहकर समर्पण कर दिया था कि मुसलमान नाराज होंगे। कांग्रेस आज एक बार फिर मुस्लिम लीग की मानसिकता के दबाव में झुक रही है। वही मुस्लिम लीग अब उनके साथ सरकार में है।''
भाजपा नेता ने राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ''वे पूर्ण वंदे मातरम् का गायन नहीं चाहते और इसे अनावश्यक रूप से थोपा जाना बता रहे हैं। आतंकवादियों का गुणगान करना, नक्सलियों का महिमामंडन करना और हमास एवं जमात को मंच देना उनके लिए पूरी तरह ठीक है। उसे थोपना नहीं माना जाता, लेकिन राष्ट्रगीत को थोपना माना जाता है।''
उन्होंने कहा, ''यह उस पार्टी की सोच है जो कहती है कि 'भारत माता की जय' नहीं बल्कि 'सोनिया माता की जय' कहा जाना चाहिए। यही (उनकी) असली मानसिकता है।''
भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी थरूर पर निशाना साधा।
भंडारी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रगीत है-यह कोई राजनीतिक चयन नहीं है और न ही 'वैकल्पिक' है। यदि राज्य राजनीतिक तुष्टीकरण के लिए राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की अनदेखी करने लगें, तो राष्ट्रीय एकता की भावना ही कमजोर होती है।''
उन्होंने कहा, ''समस्या वंदे मातरम् से नहीं है। समस्या उन लोगों से है, जिन्हें इसे कहने में असहजता होती है।''
थरूर ने संवाददाताओं से सोमवार को कहा था कि वंदे मातरम् का सभी सम्मान करते हैं लेकिन हर समारोह में इसके सभी अंतरे बजाने को अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा था, ''वंदे मातरम् राष्ट्रगीत है और जब इसे गाया जाता है तो हम सम्मानपूर्वक खड़े हो जाते हैं। इसका पहला अंतरा या शुरुआती दो अंतरे, ज्यादातर लोगों को मुंह जुबानी याद होते हैं।''
थरूर ने कहा था कि परंपरागत रूप से यह गीत किसी कार्यक्रम की शुरुआत में एक बार गाया जाता है जबकि राष्ट्रगान अलग से, अक्सर अंत में बजाया जाता है।
उन्होंने कहा था, ''अब वे चाहते हैं कि हर कार्यक्रम की शुरुआत में और अंत में पांचों अंतरे गाए जाएं। मुझे लगता है कि यह एक अनावश्यक थोपा हुआ नियम है।''
भाषा सिम्मी मनीषा
मनीषा
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