द्रमुक के बहिष्कार के बाद 'इंडिया' गठबंधन अब सिर्फ कागजों पर मौजूद: भाजपा
वैभव
- 05 Jun 2026, 12:51 PM
- Updated: 12:51 PM
नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) द्वारा आठ जून को नयी दिल्ली में प्रस्तावित विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की बैठक में शामिल नहीं होने की घोषणा किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को दावा किया कि यह गठबंधन अब ''टूटकर बिखर चुका है'' और केवल कागजों तथा टेलीविजन स्क्रीन तक ही सीमित रह गया है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन अब ''खत्म हो चुका है'' और जमीनी स्तर पर उसका कोई अस्तित्व नहीं बचा है।
द्रमुक ने बृहस्पतिवार को घोषणा की थी कि वह आठ जून को होने वाली बैठक में हिस्सा नहीं लेगी। पार्टी ने इसके लिए कांग्रेस के साथ मतभेदों को वजह बताया। द्रमुक का यह रुख उस समय से जारी है जब कांग्रेस ने तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव जीतने वाली पार्टी 'तमिलगा वेत्री कषगम' (टीवीके) के साथ हाथ मिलाया था।
द्रमुक की यह घोषणा विपक्षी गठबंधन के लिए एक बड़े झटके से कम नहीं है।
पूनावाला ने एक वीडियो बयान में कहा, ''यह अनुमान पहले ही व्यक्त किया गया था कि चार मई के बाद 'इंडिया' गठबंधन नाम की कोई चीज नहीं बचेगी और अब यह भविष्यवाणी सच साबित हो गई है।'' उन्होंने हाल में तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों का हवाला दिया।
उन्होंने कहा, '''इंडिया' गठबंधन अब दफन हो चुका है। यह शायद कागजों और टीवी स्क्रीन पर दिखाई दे, लेकिन वास्तविकता में इसका कोई अस्तित्व नहीं है।''
भाजपा प्रवक्ता ने द्रमुक के बैठक में शामिल नहीं होने के फैसले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने सहयोगियों के साथ ''विश्वासघात'' किया है।
उन्होंने कहा, ''द्रमुक ने साफ तौर पर कहा है कि वह आगामी दिनों में होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में कांग्रेस के साथ नहीं बैठेगी। उसका कहना है कि कांग्रेस ने उसकी पीठ में छुरा घोंपा है।''
पूनावाला ने विपक्षी दलों की साझेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि गठबंधन में शामिल कई दल विभिन्न राज्यों में एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं।
उन्होंने कहा, ''पश्चिम बंगाल, पंजाब, कर्नाटक, दिल्ली, उत्तराखंड या मध्य प्रदेश में 'इंडिया' गठबंधन कहां मौजूद था? कई राज्यों में ये दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं।''
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यह गठबंधन किसी साझा विचारधारा या उद्देश्य के बजाय राजनीतिक अवसरवाद पर आधारित है।
उन्होंने कहा, ''यह गठबंधन अवसरवाद का मॉडल था। इसमें कोई मिशन नहीं था, केवल भ्रम, विभाजन और पदों की महत्वाकांक्षा थी।''
पूनावाला ने दावा किया कि गठबंधन के दल राज्यों में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता का प्रदर्शन करते थे।
उन्होंने कहा, ''केरल में कांग्रेस और वाम दल एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन दिल्ली में मित्रता का दावा करते थे। पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी वे आमने-सामने थे, जबकि राष्ट्रीय राजधानी में एकजुटता का प्रदर्शन किया जाता था।''
उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय दलों का कांग्रेस पर से भरोसा उठ चुका है और वे अब उसे ''धोखेबाज पार्टी'' के रूप में देख रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''द्रमुक के साथ जो हुआ, उसके बाद सभी क्षेत्रीय दल समझ गए हैं कि कांग्रेस भरोसेमंद सहयोगी नहीं है।''
समाजवादी पार्टी का उल्लेख करते हुए पूनावाला ने दावा किया कि उसने भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने के संकेत दिए हैं।
उन्होंने कहा, ''समाजवादी पार्टी पहले ही कह चुकी है कि वह उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी।''
द्रमुक ने कहा है कि वह अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए अगले सप्ताह होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में भाग नहीं लेगी। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस के रुख से उसके कार्यकर्ता गहरे आहत हैं और इसे वे विश्वासघात के रूप में देखते हैं।
भाषा मनीषा वैभव
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