विशाखापत्तन इस्पात संयंत्र में भीषण विस्फोट से आठ श्रमिकों की मौत
संतोष
- 09 Jun 2026, 12:25 AM
- Updated: 12:25 AM
(तस्वीरों के साथ जारी)
विशाखापत्तनम, आठ जून (भाषा) विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र के नाम से जाने जाने वाले राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड में सोमवार को अचानक हुए ''भीषण'' विस्फोट में आठ श्रमिकों की मौत हो गई और छह अन्य श्रमिक घायल हो गए।
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की एक विज्ञप्ति के अनुसार, विस्फोट इस्पात संयंत्र की 'स्टील मेल्ट शॉप-1' में शाम करीब सवा चार बजे हुआ।
विज्ञप्ति में कहा गया, ''लैडल में रखे गर्म कच्चे इस्पात को टंडिश में डालने के लिए स्लाइड गेट खोलने से पहले अचानक भीषण विस्फोट हुआ। इस इस्पात को आगे 'कास्टर' में ले जाया जाना था। गंभीर रूप से घायल होने के कारण आठ लोगों ने दम तोड़ दिया। छह अन्य लोग घायल हुए हैं और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।''
विस्फोट के बाद आग का भीषण गोला छत तक उठा और ऊपर लगी क्रेन में आग लग गई।
विज्ञप्ति में कहा गया, ''आरआईएनएल (राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड) दुर्घटना की जांच कर रहा है। इसके अलावा, बोकारो के निदेशक प्रभारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय बाहरी जांच समिति को भी दुर्घटना की जांच का जिम्मा सौंपा गया है।''
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस हादसे में लोगों की मौत होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र में हुए हादसे में श्रमिकों की मौत अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करती हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।''
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस हादसे पर दुख जताया और मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र में हुई दुर्घटना से व्यथित हूं। अपनों को खोने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। स्थानीय अधिकारी प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं।''
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि इस्पात संयंत्र में हुए हादसे से वह बेहद स्तब्ध हैं।
मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मुझे यह जानकर दुख हुआ कि इस दुर्घटना में कई श्रमिकों की मौत हो गई है। मैंने संबंधित अधिकारियों से बात की है और उन्हें सभी सरकारी विभागों के साथ समन्वय कर राहत उपाय करने का निर्देश दिया है।''
विशाखापत्तनम के जिलाधिकारी एम. अभिषिक्त किशोर के अनुसार, छह घायलों में से दो की हालत गंभीर है जबकि शेष खतरे से बाहर हैं।
उन्होंने बताया कि घायल श्रमिकों को बंदरगाह शहर के दो निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
किशोर ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और प्रभावित इकाई में अन्य कामकाज रोक दिया गया है, जिससे ''आगे किसी और दुर्घटना की गुंजाइश नहीं है।''
पुलिस के अनुसार, पिघला हुआ लोहा श्रमिकों पर गिर गया।
पुलिस ने कहा कि पिघले हुए लोहे का तापमान करीब 1,600 डिग्री सेल्सियस था।
इस्पात राज्य मंत्री बी. श्रीनिवास वर्मा ने संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी आधी रात तक यहां पहुंचेंगे।
उन्होंने कहा, ''विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र में आज की दुर्घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। हम एक-दो दिन में इन कारणों का पता लगाने की कोशिश करेंगे कि विस्फोट कैसे हुआ या क्या लैडल टूट गया था।''
उन्होंने कहा कि वह भी बंदरगाह शहर जाएंगे।
उन्होंने कहा कि फिलहाल दुर्घटनास्थल पर जाना निषिद्ध है। उन्होंने कहा कि वह संयंत्र की स्थिति की समीक्षा करेंगे और आवश्यक कार्रवाई करने की कोशिश करेंगे।
इस बीच, इस्पात संयंत्र के श्रमिकों के एक प्रतिनिधि ने एक क्षेत्रीय टेलीविजन चैनल को बताया कि 'ब्लास्ट फर्नेस' से लाया गया पिघला हुआ लोहा सामान्य तौर पर अत्यधिक उच्च तापमान पर फिर गर्म किया जाता है और फिर उसे प्रसंस्करण के लिए लैडल में दूसरी इकाई तक ले जाया जाता है।
उन्होंने कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान लैडल से पिघला हुआ इस्पात गिर गया, जिससे भीषण आग लग गई और आसपास मौजूद श्रमिकों को भागना पड़ा।
उन्होंने कहा, ''तीन श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई और कुछ घायलों ने अस्पताल ले जाए जाते समय दम तोड़ दिया।''
दुर्घटना पाली बदलने के समय हुई, जिससे घटना के समय क्षेत्र में मौजूद कर्मियों की सही संख्या का तुरंत पता लगाना मुश्किल हो गया है।
इस बीच, मुख्यमंत्री नायडू ने इस्पात संयंत्र हादसे के कारण राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) गठबंधन सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर मंगलवार को तिरुपति में होने वाली जनसभा स्थगित कर दी।
भाषा सिम्मी संतोष
संतोष
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