विमानों की आपूर्ति में देरी से वृद्धि, आधुनिकीकरण पर पड़ा असर: एयर इंडिया सीईओ
अजय
- 09 Jun 2026, 04:44 PM
- Updated: 04:44 PM
विमानों की आपूर्ति में देरी से वृद्धि, आधुनिकीकरण पर पड़ा असर:
(मनोज राममोहन)
रियो डी जेनेरियो, नौ जून (भाषा) एयर इंडिया के निवर्तमान मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने कहा है कि पिछले चार वर्षों में एयरलाइन की बुनियाद को फिर से मजबूत किया गया है, लेकिन निर्धारित समय पर विमानों की आपूर्ति न होने से इसकी वृद्धि और बेड़े के आधुनिकीकरण पर महत्वपूर्ण असर पड़ा है।
पद छोड़ने की घोषणा कर चुके विल्सन ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा कि वह इस वर्ष के अंत में पद से हटने के बाद किसी अन्य पूर्णकालिक कार्यकारी भूमिका में नहीं जाएंगे और सलाहकार एवं शिक्षण जैसे कार्यों पर ध्यान देंगे।
विल्सन ने सात अप्रैल को एयर इंडिया का सीईओ एवं प्रबंध निदेशक पद छोड़ने की घोषणा की थी। वह इस पद पर मई, 2022 में नियुक्त किए गए थे।
जनवरी, 2022 में निजीकरण के बाद एयर इंडिया फिलहाल व्यापक बदलाव की प्रक्रिया से गुजर रही है। हालांकि, टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त स्वामित्व वाली एयरलाइन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
एयर इंडिया के प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल को 54 वर्षीय विल्सन ने 'एक शानदार सफर' बताते हुए कहा कि इस दौरान सांस्कृतिक बदलाव, चार एयरलाइंस के विलय, नई पहचान और उत्पाद उन्नयन जैसे कदम उठाए गए।
विल्सन ने कहा कि पिछले चार वर्षों में एयर इंडिया की बुनियाद को फिर से मजबूत किया गया है, लेकिन निर्धारित समय पर विमानों की आपूर्ति न होने से इसकी वृद्धि और बेड़े के आधुनिकीकरण पर महत्वपूर्ण असर पड़ा है।
उन्होंने विमानों की समय पर आपूर्ति न होने को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि अगर निर्धारित समय पर विमान मिल गए होते तो एयर इंडिया के कायाकल्प का काम काफी आगे बढ़ चुका होता।
इसके अलावा, फर्स्ट क्लास एवं बिजनेस श्रेणी की सीटों की आपूर्ति बाधित होने से चौड़े आकार वाले विमानों के उन्नयन में लगभग दो साल की देरी हो गई।
एयर इंडिया समूह के पास वर्तमान में 300 से अधिक विमान हैं, जिनमें एयर इंडिया के बेड़े में 184 विमान शामिल हैं। कंपनी को भविष्य में 670 विमानों की आपूर्ति मिलनी है, जो उसके विस्तार के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा कि चार वर्षों के बाद यह नेतृत्व परिवर्तन का 'स्वाभाविक समय' है। कंपनी ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश के लिए एक समिति गठित की है।
एयरलाइन को हाल के वर्षों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिनमें 2025 में ड्रीमलाइनर दुर्घटना, पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का बंद होना और परिचालन लागत में वृद्धि शामिल हैं।
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