तृणमूल नेताओं ने बागी सांसदों पर राजनीतिक नैतिकता की कमी और भाजपा से संबंध होने का लगाया आरोप
नरेश
- 09 Jun 2026, 05:15 PM
- Updated: 05:15 PM
(तस्वीरों सहित)
नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने मंगलवार को पार्टी के बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर राजनीतिक नैतिकता की कमी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबंध रखने और संकट के समय पार्टी कार्यकर्ताओं को छोड़ने का आरोप लगाया।
बनर्जी ने यह सवाल भी उठाया कि बागी सांसदों के पास अगर उतना समर्थन था जितना वो दावा कर रहे थे, तो वे औपचारिक रूप से भाजपा में क्यों शामिल नहीं हो रहे। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा उन्हें नहीं लेगी।
यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह प्रेस वार्ता उन दावों के जवाब में बुलाई गई है, जिनमें बागी सांसदों ने कहा था कि लोकसभा में पार्टी के अधिकतर सांसद उनके समर्थन में हैं और वे एक अलग गुट के रूप में मान्यता लेने की तैयारी कर रहे हैं।
तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को दावा किया था कि वे लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रति समर्थन की घोषणा करेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि पार्टी के लगभग 20 सांसद उनके साथ हैं।
बनर्जी ने तृणमूल के पूर्व राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ आरोप लगाकर और इस्तीफा देकर नैतिकता का उदाहरण प्रस्तुत किया और बागी सांसदों को भी यही रास्ता अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "सुखेंदु शेखर रॉय ने हमारी पार्टी पर आरोप लगाने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। जो लोग पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं, उन्हें सुखेंदु के रास्ते पर चलना चाहिए और सांसद पद से इस्तीफ़ा देकर राजनीतिक नैतिकता दिखानी चाहिए।"
असंतुष्ट खेमे द्वारा कथित तौर पर जारी एक पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने कहा कि इतना महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है।
उन्होंने पूछा, "अगर आप इतने ही ईमानदार हैं, तो इसे सार्वजनिक क्यों नहीं करते? आपमें प्रेस को वह पत्र देने की हिम्मत क्यों नहीं है?" साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बागी नेता भाजपा के साथ हैं। दोनों नेताओं ने कहा कि बागी सांसदों ने पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की, जिससे यह साबित होता है कि वे भाजपा के साथ हैं।
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और कई वरिष्ठ सांसद जहां विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के नेताओं की बैठक में शामिल हुए, वहीं सोमवार को टीएमसी के कुछ बागी सांसद केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पश्चिम बंगाल चुनाव प्रभारी यादव के आवास पर जमा हुए, जहां अधिकारी भी मौजूद थे।
बागी नेताओं की आलोचना करते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा, "वे भले ही शब्दों की बाजीगरी दिखाएं, लेकिन जनता बेवकूफ नहीं है। उन्होंने अपना नेता ममता बनर्जी से बदलकर नरेन्द्र मोदी को बना लिया है।"
बनर्जी ने यह भी सवाल उठाया कि अगर बागी सांसदों के पास उतना समर्थन था जितना वे दावा कर रहे थे, तो वे औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल क्यों नहीं हो रहे थे। उन्होंने दावा किया, "वजह साफ है, भाजपा उन्हें नहीं लेगी।"
बनर्जी ने कहा कि बागी सांसदों को दिल्ली से दावे करने के बजाय अपने चुनाव क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं का सामना करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "मैं हर सांसद को अपने चुनाव क्षेत्र में जाने, टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ बैठने और उनका सामना करने के लिए कहूंगा।"
पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर राजनीतिक दमन का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने दावा किया कि प्रशासन विपक्षी कार्यकर्ताओं और नेताओं को परेशान कर रहा है।
उन्होंने कहा, "उन कार्यकर्ताओं का साथ देना हमारी ज़िम्मेदारी है जिन्हें परेशान किया जा रहा है और सड़कों पर नहीं आने दिया जा रहा है। इसके बजाय वे भाजपा में शामिल हो रहे हैं। हम बहुत खुश हैं कि दोहरे चरित्र वाले लोग चले गए हैं।"
बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान से संपर्क किया।
उन्होंने आरोप लगाया, "कल मेरी यूसुफ पठान से बात हुई। वह बड़ौदा में थे। उन्होंने बताया कि अमित शाह ने उन्हें बुलाया है और वह उनसे मिलने दिल्ली आ रहे हैं... अमित शाह पार्टी को तोड़ने का काम कर रहे हैं, वही वो व्यक्ति हैं।"
विपक्षी दलों को कमज़ोर करने की बड़ी कोशिश का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में असहमति के लिए जगह होनी चाहिए।
बनर्जी ने दावा किया, "वे विपक्षी सांसदों को अपने साथ मिलाकर लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं। जो लोग उनका समर्थन करेंगे, उन्हें फ़ायदा मिलेगा। उन्हें पुलिस की ताक़त दी जाएगी।"
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि पार्टी पर दल-बदल का कोई असर नहीं पड़ेगा, उन्होंने कहा, "नेता ममता हैं। चुनाव चिह्न टीएमसी का ही है। अगर 20 से ज़्यादा लोग भी चले जाएं, तो भी कोई समस्या नहीं है।"
बनर्जी ने ज़ोर देकर कहा कि पार्टी दल-बदल के बावजूद अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगी और कहा कि टीएमसी कार्यकर्ता मज़बूती से नेतृत्व के साथ खड़े हैं।
आजाद ने भी बागी सांसदों पर पार्टी को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि वे भाजपा के साथ जाना चाहते हैं तो इसे खुले तौर पर स्वीकार करें।
उन्होंने कहा, "जब भाजपा के गुंडे पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमला करते हैं, तो क्या आप उनका साथ देंगे? यह धोखा है। अगर आप भाजपा में जाना चाहते हैं, तो खुलकर कहें।"
आजाद ने दस्तीदार पर निशाना साधते हुए पार्टी नेतृत्व की उनकी आलोचना पर सवाल उठाए और संगठन के भीतर उन्हें मिले मौकों का ज़िक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया, "काकोली पांच चुनाव हार गईं, फिर भी ममता बनर्जी ने उन्हें सांसद बनाया। आपको मुख्य सचेतक के पद से इसलिए हटाया गया क्योंकि आप संसद नहीं आती थीं और फोन पर ही निर्देश देती थीं।"
बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार न दिखाने के लिए कुछ बागी नेताओं की कड़ी आलोचना की।
बागी सांसद मिताली बाग का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "कोई उनका नाम नहीं जानता था। मैं उन्हें साथ ले गया और दीदी से उन्हें टिकट देने को कहा, इसीलिए वह सांसद बनीं।"
उन्होंने एक और बागी सांसद का भी ज़िक्र किया और कहा, "जून मालिया का नाम एक अख़बार के संपादक ने सुझाया था।"
उन्होंने दावा किया कि कई नेता, जो अब पार्टी की आलोचना कर रहे हैं, उन्होंने हाल तक ममता बनर्जी के प्रति वफादारी दिखाई थी। उन्होंने कहा, "वे कहते थे कि दीदी के अलावा कोई नहीं है।"
आजाद ने कहा, "ये गद्दार जा सकते हैं, लेकिन उन्हें कभी तृणमूल का नाम नहीं लेना चाहिए। हमारा जन्म संघर्ष से हुआ है।"
भाषा
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