दो साल की देरी के बाद प. बंगाल में लागू होगी चाय बागान श्रमिकों के कल्याण की केंद्रीय योजना
अजय
- 09 Jun 2026, 07:40 PM
- Updated: 07:40 PM
कोलकाता, नौ जून (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार 'प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना' लागू करने जा रही है। इसके लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिससे चाय बागान श्रमिकों के कल्याण के लिए 314 करोड़ रुपये जारी करने का रास्ता साफ हो गया है। चाय बोर्ड के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
इस केंद्रीय योजना का मकसद असम और पश्चिम बंगाल के 1,210 चाय बागानों में काम करने वाले 10 लाख से ज्यादा श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आराम की सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
पश्चिम बंगाल में इसे लगभग दो साल तक लागू नहीं किया जा सका क्योंकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए जरूरी 'राज्य स्तरीय समिति' (एसएलसी) का गठन नहीं किया था।
वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित कुमार ने कार्यक्रम के दौरान कहा, ''कुल 1,000 करोड़ रुपये के बजट वाली यह योजना असम और पश्चिम बंगाल के लिए है, जो चाय उत्पादन करने वाले दो प्रमुख राज्य हैं।''
उन्होंने कहा, ''दो साल बीत चुके हैं, लेकिन बंगाल के लिए आवंटित 314 करोड़ रुपये में से कोई पैसा जारी नहीं किया गया है। इस योजना का पैसा तीन साल के लिए था और अब इसका पूरा इस्तेमाल करने के लिए सिर्फ़ एक साल बचा है।''
चाय बोर्ड के उपाध्यक्ष सी. मुरुगन ने कहा, ''हमारी बार-बार की गुजारिश के बावजूद एसएलसी का गठन नहीं किया गया। चूंकि कोष जारी करने के लिए समिति का गठन जरूरी है, इसलिए पश्चिम बंगाल में यह योजना लागू नहीं हो सकी।''
उन्होंने कहा, ''लेकिन अब 'डबल-इंजन' सरकार के आने के बाद, योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।''
मुरुगन ने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली और राज्य व केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों वाली एसएलसी के गठन के बाद योजना को लागू करने का काम शुरू हो गया है।
उन्होंने उत्तरी बंगाल के चाय उत्पादक जिलों के अंशधारकों और चाय बोर्ड के अधिकारियों के बीच दो जून को हुई बैठक का जिक्र किया, जिसमें उस क्षेत्र के सांसद भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा, ''हमने जिला अधिकारियों और स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जल्द से जल्द योजना के प्रस्ताव जमा करने को कहा है।
एसएलसी से मंजूरी मिलने के बाद, प्रस्तावों को संचालन समिति की मंजूरी के लिए वाणिज्य विभाग को भेजा जाएगा, जिसके बाद कोष जारी किया जाएगा।
मुरुगन ने जोर देकर कहा कि यह योजना पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है और इसके लिए राज्य सरकार से किसी वित्तीय योगदान की जरूरत नहीं है। उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ''राज्य सरकार की भूमिका इसे लागू करने की है।''
तुलना करते हुए, मुरुगन ने कहा कि असम ने अपने 293.5 करोड़ रुपये के आवंटन में से पहले ही 292.36 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर लिया है, जबकि पश्चिम बंगाल ने इसे लागू करना अभी शुरू ही किया है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय
0906 1940 कोलकाता