न्यायालय ने इंडियन मुजाहिदीन के दो सदस्यों की जमानत अर्जी पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा
नेत्रपाल
- 17 Jun 2026, 06:06 PM
- Updated: 06:06 PM
नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली पुलिस से इंडियन मुजाहिदीन के उन दो कथित सदस्यों की जमानत अर्जी पर जवाब मांगा, जो आतंकवाद से जुड़े मामलों के सिलसिले में करीब 12 साल से जेल में हैं।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अजहर की ओर से दायर उन याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया, जिनमें उन्हें जमानत न देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।
पीठ ने कहा कि जनवरी में अदालत की ओर से तय किए गए वे सिद्धांत इस मामले पर भी लागू होंगे, जिनके तहत दिल्ली दंगों के कई आरोपियों को जमानत दे दी गई थी, जबकि कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत प्रदान करने से मना करते हुए कहा गया था कि दोनों एक साल तक फिर से जमानत याचिका नहीं दायर कर सकते।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने कहा कि जमानत न देने का उच्च न्यायालय का आदेश ठोस दलीलों पर आधारित था और उसमें गुलफिशा फातिमा मामले (पांच जनवरी 2026) से जुड़े फैसले में तय किए गए सिद्धांतों को लागू किया गया था।
पीठ ने कहा, ''कैसा तर्कपूर्ण आदेश? जिस फैसले का जिक्र किया गया है, वह विचाराधीन है। आप क्या कह रहे हैं? केए नजीब मामला यहां पूरी तरह से लागू होगा, बशर्ते उसकी गुलफिशा फातिमा मामले में जिस तरह से व्याख्या की गई है, उसे ध्यान में रखा जाए। आपको प्रत्युत्तर दाखिल करना होगा।''
साल 2021 के केए नजीब मामले में गैरकानूनी गतिवधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामलों में मुकदमे में लंबी देरी को जमानत के लिए एक आधार माना गया। इसमें यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर लगी कानूनी पाबंदियों को दरकिनार कर दिया गया।
साकिब और अजहर को दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ की ओर से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर 2014 में गिरफ्तार किया गया था।
यह मामला तब उत्पन्न हुआ, जब इंडियन मुजाहिदीन के कथित सदस्य मोहम्मद कतील सिद्दीकी को 21 नवंबर 2011 को दिल्ली में आनंद विहार अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के पास पकड़ा गया।
पूछताछ के दौरान सिद्दीकी ने उन लोगों के नाम बताए, जिनके बारे में माना जाता है कि वे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य हैं।
इंडियन मुजाहिदीन भारत में कई आतंकवादी घटनाओं में शामिल था, जिनमें 2010 में पुणे में जर्मन बेकरी में हुआ धमाका, 2010 में बेंगलुरु में चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुआ धमाका और 2010 में दिल्ली में जामा मस्जिद पर किया गया हमला शामिल है।
सिद्दीकी से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और भारी मात्रा में विस्फोटक, हथियार और गोला-बारूद जब्त किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 24 अप्रैल को दोनों आरोपियों को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि भले ही वे लंबे समय से जेल में हैं, लेकिन उनकी रिहाई से राष्ट्रीय सुरक्षा और सलामती को बड़ा खतरा हो सकता है।
भाषा पारुल नेत्रपाल
नेत्रपाल
1706 1806 दिल्ली