मेट्रो स्टेशनों पर पुराने कपड़े दान करने संबंधी 'अर्पण' केंद्रों को स्थापित करने के लिए एमओयू
अविनाश
- 14 Jul 2026, 09:37 PM
- Updated: 09:37 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) दिल्ली में पुराने कपड़े दान करने की योजना के तहत मेट्रो के 10 स्टेशनों पर 'अर्पण' नाम से संग्रह केंद्र बनाए जाएंगे जहां लोगों से कपड़े एकत्रित किए जाएंगे और फिर उकना पुन:चक्रण कर बैग, परिधान, सजावटी सामान और धागा समेत अन्य उत्पाद बनाए जाएंगे।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस बाबत दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) और डीएमआरसी लेडीज वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन (डीएलडब्ल्यूओ) ने दिल्ली सरकार के राज्य शहरी आजीविका मिशन (एसयूएलएम) और विभिन्न संस्थाओं 'क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन' और 'रेस्पन' के साथ एक समझौता (एमओयू) किया है।
बयान में कहा गया है कि इसका उद्देश्य पुराने और उपयोग किए गए कपड़ों को कूड़ा भराव स्थल में जाने से रोकना, वस्त्र अपशिष्ट को कम करना और पुनर्चक्रण तथा पुनरुपयोग के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
इस परियोजना के तहत लोगों के घरों में रखे अनुपयोगी कपड़े एकत्र करने के लिए दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर 'अर्पण' नाम से संग्रह केंद्र बनाए जाएंगे। इसके साथ ही, पुनर्चक्रण से तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री के लिए कियोस्क (बूथ) भी लगाए जाएंगे।
बयान के अनुसार, परियोजना के पहले चरण में शाहदरा, डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग पश्चिम और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशनों पर 'अर्पण' केंद्र शुरू किए जाएंगे। यहां लोग सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक अपने पुराने कपड़े आसानी से दान कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया, "एकत्र किए गए कपड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। पहली श्रेणी में ऐसे वस्त्र होंगे, जिनसे स्वयं सहायता समूह बैग, सजावटी वस्तुएं और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार कर सकेंगे। दूसरी श्रेणी में पूरी तरह अनुपयोगी कपड़ों को पुनर्चक्रित कर नए उत्पादों और कच्चे माल में बदला जाएगा।"
उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, पूजा-पाठ में उपयोग होने वाले वस्त्रों और अन्य धार्मिक सामग्री का भी सम्मानपूर्वक दोबारा उपयोग किया जाएगा ताकि लोगों की भावनाओं का सम्मान बना रहे।
गुप्ता ने कहा कि यह परियोजना वस्त्र प्रदूषण को कम करने, सतत जीवनशैली को प्रोत्साहित करने और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक अभिनव पहल है।
बयान के मुताबिक, इस परियोजना के तहत इन संग्रह केंद्रों का संचालन दिल्ली सरकार के राज्य शहरी आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाएं करेंगी। उन्हें वस्त्रों से दोबारा उपयोगी वस्तुएं बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
इसमें कहा गया है कि 'अर्पण केंद्र' के माध्यम से लोग बेहद सरल और पारदर्शी तरीके से अपने पुराने कपड़े दान कर सकेंगे। इसके लिए लोगों को केवल मेट्रो स्टेशनों पर स्थापित कियोस्क पर जाकर वहां उपलब्ध क्यूआर कोड स्कैन करना होगा और एक संक्षिप्त डिजिटल फॉर्म भरना होगा, जिसमें नाम, मोबाइल नंबर और दान किए जाने वाले कपड़ों का विवरण दर्ज किया जाएगा। इसके बाद उन्हें तुरंत डिजिटल प्रमाणपत्र मिल जाएगा।
भाषा नोमान
नोमान अविनाश
अविनाश
1407 2137 दिल्ली