त्रि-भाषा नीति छात्रों के हित में है: सीबीएसई ने न्यायालय में कहा
वैभव
- 14 Jul 2026, 09:53 PM
- Updated: 09:53 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी ने उच्चतम न्यायालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तीन-भाषा ढांचे के कार्यान्वयन का बचाव करते हुए दलील दी कि यह ''बहुभाषावाद और राष्ट्रीय एकता'' को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई)और राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने अलग-अलग हलफनामों में देश भर के सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों में अपनाई गई तीन-भाषा नीति के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध किया।
इस बीच, प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को केंद्र, एनसीईआरटी और सीबीएसई से दो नई याचिकाओं पर जवाब तलब किया। इन याचिकाओं में 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन भाषाएं (जिनमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं) पढ़ने की बोर्ड की नीति को चुनौती दी गई है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि बहुभाषावाद और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए त्रि-भाषा नीति आवश्यक है। इसमें दलील दी गई कि भाषा की शिक्षा और कई भाषाएं सीखने से जुड़ी सिफारिशें एनईपी के तहत परिकल्पित बड़े शैक्षिक सुधारों का हिस्सा हैं।
मंत्रालय ने कहा है कि एनईपी-2020 के तहत, ''स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफएसई)-2023'' त्रि-भाषा फॉर्मूले को लागू करने पर जोर देती है और यह सुझाव देती है कि छात्र कक्षा 6 से 10 तक तीन भाषाएं सीखें, जिनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की हों।
हलफनामा के मुताबिक इस नीति का उद्देश्य सीखने वालों में न सिर्फ सोच में, बल्कि भावना, बुद्धि और कामों में भी भारतीय होने का गहरा गौरव पैदा करना है। साथ ही, ऐसी जानकारी, हुनर, मूल्य और नज़रिए विकसित करना है जो मानवाधिकारों, सतत विकास और जीवन-शैली, और विश्व कल्याण के प्रति ज़िम्मेदार प्रतिबद्धता को बढ़ावा दें, जिससे वे सच्चे वैश्विक नागरिक बन सकें।
सीबीएसई ने कहा है कि भाषा नीति को एक ''योजनाबद्ध, चरणबद्ध और व्यवस्थित'' प्रक्रिया के जरिए लागू किया गया है और यह छात्रों को विदेशी भाषाएं छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करती है।
बोर्ड ने 15 मई को तीन-भाषा योजना को लेकर उसके द्वारा जारी परिपत्र को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में दाखिल हलफनामे में कहा, '' पाठ्यक्रम तैयार करना, पढ़ाई की योजना बनाना, भाषाओं का चुनाव और उनका क्रम तय करना, पढ़ाने का तरीका और मूल्यांकन का तरीका - ये सभी मुख्य रूप से शैक्षणिक नीति के मामले हैं जो विशेषज्ञ शैक्षणिक निकायों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, और ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित होता है...।''
सीबीएसई ने हलफनामा में कहा कि याचिकाकर्ताओं की चिंताएं काफी हद तक 29 जून को जारी दिशानिर्देश और उसके बाद 10 जुलाई को जारी परिपत्र के जरिए दूर कर दी गई हैं। इनमें बदलाव के दौरान छूट और सुरक्षा उपाय दिए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लागू करने के दौरान किसी भी छात्र को नुकसान नहीं हो।
सीबीएसई ने कहा कि वर्तमान में कक्षा 10 (शैक्षणिक सत्र 2026-27) में पढ़ रहे छात्र मौजूदा दो-भाषा प्रणाली के तहत अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे और उन्हें तीसरी भाषा का अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
बोर्ड ने कहा कि मौजूदा समय में 12वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों के लिए तीसरी भाषा (आर3)का मूल्यांकन केवल स्कूल के स्तर पर आंतरिक होगा। वहीं शैक्षणिक सत्र 2027-28 में जब 10वीं कक्षा की परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए भी तीसरे भाषा की परीक्षा नहीं होगी।
सीबीएसई ने कहा है कि जिन छात्रों ने पहले ही दो गैर-मूल भाषाएं (जैसे अंग्रेज़ी और फ़्रेंच) चुनी थीं, उन्हें एक बार के लिए छूट दी गई है। इसके तहत वे दोनों भाषाओं की पढ़ाई जारी रख सकते हैं और साथ ही तीसरी भाषा के तौर पर एक भारतीय भाषा को भी शामिल कर सकते हैं।
हलफनामे में कहा गया कि विदेशी भाषाएं पढ़ाई की योजना का हिस्सा बनी हुई हैं और उन्हें हटाया नहीं गया है। याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील को खारिज करते हुए सीबीएसई ने शीर्ष अदालत से कहा है कि विदेशी भाषा की पढ़ाई खत्म कर दिए जाने का दावा ''तथ्यात्मक रूप से गलत'' है।
बोर्ड ने दलील दी कि विदेशी भाषा की पढ़ाई या तो तीन भाषाओं में से एक के तौर पर जारी रखी जा सकती है (बशर्ते बाकी दो भारतीय भाषाएं हों), या फिर एक अतिरिक्त चौथी भाषा के तौर पर।
सीबीएसई ने कहा कि शिक्षकों, पाठ्यपुस्तकों और सीखने के संसाधनों की कमी को लेकर जताई जा रही आशंकाएं बेबुनियाद हैं।
बोर्ड ने अदालत को सूचित किया कि एनसीईआरटी ने कक्षा के हिसाब से सीखने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। साथ ही, विद्यालयों में संबंधित भाषाओं के शिक्षकों की भर्ती के लिए नियमों में ढील दी गई है जिनमें पढ़ाने में सक्षम मौजूदा शिक्षकों की सेवा लेना, सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों को नियुक्त करना, अहर्ता प्राप्त स्नातकोत्तर की सेवा लेना, 'सहोदय क्लस्टर' के ज़रिए विद्यालयों के बीच संसाधनों का बंटवारा और ऑनलाइन या 'हाइब्रिड' तरीके से पढ़ाना शामिल है।
सीबीएसई ने कहा कि यह उन छात्रों को भी रियायत देता है जिनके माता-पिता दूसरे राज्य में चले जाते हैं और ऐसी स्थिति में विद्यार्थी दूसरे स्थान पर भी अपनी मौजूदा भाषा संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
नीति की संवैधानिक वैधता का बचाव करते हुए, बोर्ड ने कहा है कि 15 मई का परिपत्र न तो मनमाना है और न ही भेदभावपूर्ण, और यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(जी), 21, 21ए या 29 का उल्लंघन नहीं करता है।
एनसीईआरटी ने अपने निदेशक प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी के जरिए दाखिल हलफनामे में कहा कि यह बदलाव क्षमता-आधारित अध्ययन, बहुभाषी शिक्षा, उम्र के हिसाब से पढ़ाने के तरीके और भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता से जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहा है।
हलफनामे में कहा गया कि एनसीईआरटी ने सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में नौंवी कक्षा के लिए 'आर3' भाषा शिक्षण संसाधन सामग्री की समीक्षा, जांच, अंतिम रूप देने और मंजूरी के लिए आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं।
इसमें कहा गया है कि नौंवी कक्षा के छात्रों के लिए 'आर3' की पाठन सामग्री हिंदी, संस्कृत, मराठी और उर्दू भाषाओं में पहले ही जारी की जा चुकी है और एनसीईआरटी की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है।
भाषा धीरज वैभव
वैभव
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