डेलॉयट का अनुमान, चालू वित्त वर्ष में 6.5 से 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था
अजय
- 19 Jul 2026, 12:54 PM
- Updated: 12:54 PM
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.5 से 6.8 प्रतिशत रहेगी। डेलॉयट इंडिया ने यह अनुमान लगाया है।
डेलॉयट ने अपनी ताजा आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी रह सकती है, लेकिन दूसरी छमाही में त्योहारी मांग, मौद्रिक नीतियों में नरमी और वैश्विक हालात में सुधार से अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने वर्ष 2026 की शुरुआत मजबूत आर्थिक बुनियाद के साथ की थी, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक घटनाक्रमों ने आर्थिक माहौल को प्रभावित किया है। इससे प्रमुख समुद्री मार्गों में बाधा, जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव, निवेशकों की चिंता और पूंजी निकासी जैसी स्थितियां पैदा हुईं। इसका असर व्यापार घाटे और रुपये की विनिमय दर पर भी पड़ा।
इन्हीं घटनाक्रमों के मद्देनजर भारतीय रिजर्व बैंक ने भी हाल में चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी।
डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित हो गई हैं। उन्होंने कहा कि हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंक के नीतिगत कदम कुछ जोखिमों को कम कर सकते हैं, लेकिन मौसम संबंधी अनिश्चितता, खासकर अल नीनो का कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर प्रभाव, एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विस्तार मध्यम अवधि में वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। हालांकि, बाजार तक पहुंच बढ़ाने के साथ घरेलू उद्योगों को मजबूत करना, बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करना, आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाना और नवोन्मेषण और कौशल विकास में निवेश बढ़ाना जरूरी होगा।
डेलॉयट ने महंगाई को आर्थिक वृद्धि के लिए एक प्रमुख जोखिम बताया है। कच्चे तेल, उर्वरक, आवश्यक खनिज और खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों के साथ कमजोर रुपये का असर घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है।
जून में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई, जो पिछले 18 माह का उच्च स्तर है। रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मानसून आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई का दबाव बढ़ा सकता है, क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी करीब 46 प्रतिशत है।
रिपोर्ट कहती है कि नीति-निर्माताओं के सामने महंगाई पर नियंत्रण और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के बीच संतुलन कायम रखने की चुनौती होगी।
भाषा अजय अजय
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