आपदा के प्रति पूर्व तैयारी और जागरुकता से जन-धन की हानि कम की जा सकती है : योगी आदित्यनाथ
आनन्द रवि कांत
- 19 Jul 2026, 01:12 PM
- Updated: 01:12 PM
लखनऊ, 19 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि आपदा के प्रति पूर्व सतर्कता, तैयारी और जागरुकता से जन-धन की हानि को न्यूनतम स्तर तक लाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी तंत्र का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यहां राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के नए मुख्यालय भवन के लोकार्पण के बाद आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
आदित्यनाथ ने कहा, ''अक्सर आपदा आने के बाद हम संवेदना व्यक्त करते हैं, लेकिन यदि पहले से सतर्कता, तैयारी और जागरुकता हो तो जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।''
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी को पाठ्यक्रम, परिवार और सामाजिक संवाद का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने अपने बचपन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि आग, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान बरती जाने वाली सामान्य सावधानियों की जानकारी लोगों को दी जाती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जागरुकता के अभाव में सामान्य व्यवहार भी नुकसान का कारण बन सकता है, जबकि सही जानकारी से बड़ी से बड़ी दुर्घटना को टाला जा सकता है।
आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे जनजागरुकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए, जिनसे सामान्य नागरिक भी आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में सहयोग कर सके।
उन्होंने कहा कि जब आपदा न हो, तब प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा छात्रों और शिक्षकों को भी आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।
योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी आपदा की श्रेणी में शामिल किया है।
उन्होंने हाल में बहराइच में मगरमच्छ के हमले में 12 वर्षीय बालक की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मगरमच्छ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में चार हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि अन्य प्राकृतिक आपदाओं में लगभग पांच हजार लोग प्रभावित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने हाल में बिजनौर के दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि जिले में अब तक 80 तेंदुओं को बचाया जा चुका है और वे प्रायः गन्ने के खेतों में पाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि बाघ और तेंदुए के व्यवहार में अंतर होता है तथा लोगों को इसके बारे में जागरूक करना भी जीवन रक्षा के लिए जरूरी है।
योगी ने आकाशीय बिजली से होने वाली जनहानि रोकने के लिए तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि समय रहते पूर्वानुमान और चेतावनी जारी कर लोगों की जान बचाई जा सकती है।
उन्होंने हाल में आए तूफान और आकाशीय बिजली से एक ही दिन में 111 से अधिक लोगों की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बाद सरकार ने तकनीक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने सहारनपुर स्थित शाकंभरी देवी मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि समय पर जारी अलर्ट के कारण प्रशासन ने हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया।
उन्होंने कहा कि कुछ ही देर बाद शिवालिक की पहाड़ियों से तेज बहाव के साथ पानी आया और यदि समय रहते लोगों को नहीं हटाया जाता तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।
आदित्यनाथ ने कहा कि आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को इस क्षेत्र की उत्कृष्ट संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिए तथा शिक्षकों, छात्रों, पुलिसकर्मियों, होमगार्ड, सिंचाई विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को भी नियमित प्रशिक्षण से जोड़ा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''हमारा संकल्प हर प्रकार की आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने का होना चाहिए। उत्तर प्रदेश का प्रत्येक नागरिक इसे अपना नागरिक और राष्ट्रीय कर्तव्य समझे।''
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा मोचन बल और अग्निशमन सेवा के उत्कृष्ट कार्य करने वाले जवानों को सम्मानित भी किया।
समारोह में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि नए मुख्यालय भवन का लोकार्पण सरकार की संवेदनशीलता और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस अवसर पर राजस्व राज्य मंत्री सुरेंद्र दिलेर, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक राजेश्वर सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, लखनऊ में शहीद पथ स्थित डायल-112 मुख्यालय के निकट 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का नया मुख्यालय आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है।
इसमें सातों दिन और 24 घंटे संचालित अत्याधुनिक राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र, 200 से अधिक लोगों की क्षमता वाला सभागार, क्लासरूम, व्याख्यान कक्ष, छात्रावास, पुस्तकालय तथा राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए डिजिटल कमांड, कंट्रोल एवं समन्वय केंद्र की भी व्यवस्था की गई है।
भाषा
आनन्द रवि कांत
1907 1312 लखनऊ