आत्मविश्वास का मिला फल, लेकिन विश्व चैंपियनशिप में पदक के लिए लय बनाए रखना होगा अहम: सिंधू
सुधीर
- 19 Jul 2026, 01:19 PM
- Updated: 01:19 PM
तोक्यो, 19 जुलाई (भाषा) जापान ओपन में छह वर्षों में अपना सबसे बड़ा खिताब जीतने के बाद भावुक हुई पीवी सिंधू ने कहा कि आखिरकार अटूट आत्मविश्वास का फल मिला और अब उनका लक्ष्य अगले महीने होने वाली विश्व चैंपियनशिप में इसी लय और संयम को बनाए रखना है जिसमें वह रिकॉर्ड छठा पदक जीतने की कोशिश करेंगी।
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधू ने रविवार को आक्रामक खेल का शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान जापान की स्टार और तीन बार की विश्व चैंपियन अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से हराकर खिताब अपने नाम किया।
करीब दो साल के खिताबी सूखे को समाप्त करने के बाद भावुक सिंधू ने कहा, ''मेरी आंखों में आंसू थे क्योंकि मेरे लिए यह जीत बहुत महत्वपूर्ण थी। मैं लंबे समय से खुद पर बहुत मेहनत कर रही थी और पूरी तरह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर रही थी। ''
सिंधू का पिछला खिताब दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंटरनेशनल में आया था। तोक्यो में मिली यह जीत 2019 में विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने के बाद उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने 2022 में सिंगापुर ओपन सुपर 500 का खिताब भी जीता था।
उन्होंने कहा, ''मेरे पास बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं क्योंकि पिछली बार खिताब जीते हुए 19 महीने हो गए थे। मुझे हमेशा विश्वास था कि मैं यह कर सकती हूं। बहुत से लोग सवाल उठा रहे थे कि क्या हो रहा है, क्या सब खत्म हो गया है, लेकिन मैंने खुद पर भरोसा बनाए रखा। मैं अपने परिवार, अपने कोच और पूरे सहयोगी स्टाफ का धन्यवाद करना चाहती हूं। ''
इस जीत के साथ ही भारत में 17 से 23 अगस्त तक होने वाली विश्व चैंपियनशिप में सिंधू से रिकॉर्ड छठे पदक की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। सिंधू अब तक विश्व चैंपियनशिप में पांच पदक जीत चुकी हैं जिनमें 2019 का ऐतिहासिक स्वर्ण पदक भी शामिल है। अगर वह इस बार भी पदक जीतती हैं तो विश्व चैंपियनशिप में महिला एकल वर्ग में छह पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बन जाएंगी।
सिंधू ने कहा कि जापान ओपन में मिली यह जीत सही समय पर आई है। उन्होंने कहा, ''मुझे इसी लय को बनाए रखना है, संयमित बने रहना है, आत्मविश्वास बनाए रखना है और लगातार आगे बढ़ते रहना है। यही मेरा लक्ष्य है। इस समय जीतना और इस लय को बरकरार रखना बहुत अच्छा है। ''
जब उनसे पूछा गया कि इस सप्ताह उनके प्रदर्शन में क्या बदलाव आया, तो उन्होंने कहा कि शांत बने रहना और अनावश्यक गलतियों में कमी लाना जीत में अहम रहे।
उन्होंने कहा, ''सेमीफाइनल हो, फाइनल हो या पहला-दूसरा दौर, हर मैच में शांत चित्त बने रहना बहुत जरूरी था। कई बार बढ़त मिलने पर खिलाड़ी जल्द मैच खत्म करने की कोशिश करता है और गलतियां कर बैठता है। दूसरे गेम में मेरे साथ भी ऐसा हुआ, लेकिन मेरे कोच ने कहा कि कोई बात नहीं, अगली रैली पर ध्यान दो। मैंने पिछली गलती को भूलकर अगले अंक पर ध्यान लगाया और यही मेरे लिए निर्णायक साबित हुआ। ''
इकतीस वर्षीय सिंधू ने कहा कि अपने स्वाभाविक आक्रामक खेल में वापसी और कोर्ट पर बेहतर मूवमेंट भी उनकी सफलता का अहम कारण रहा।
उन्होंने कहा, ''मेरी सबसे बड़ी ताकत आक्रामक खेल है। जब मैं कोर्ट पर अच्छी तरह मूव कर रही हूं और प्रभावी तरीके से आक्रमण कर रही हूं तो मेरे लिए यह भी जरूरी है कि अनावश्यक गलतियां नहीं करूं। कम गलतियां करने से मैच का रुख बदल जाता है। आज लंबी रैलियां हुईं और उनमें अच्छा प्रदर्शन करना भी काफी महत्वपूर्ण रहा। ''
फाइनल मुकाबले के बारे में सिंधू ने कहा कि बढ़त मिलने के बावजूद उन्होंने एक पल के लिए भी ढिलाई नहीं बरती।
उन्होंने कहा, ''मेरे लिए पूरे मैच के दौरान सकारात्मक बने रहना बहुत जरूरी था। पहले गेम में मैं आगे थी, लेकिन वह वापसी कर रही थी। शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ बढ़त होने के बावजूद लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होती। इसलिए हर अंक मेरे लिए अहम था। मैंने पूरे मैच में अपना आक्रामक रवैया बनाए रखा और दूसरे गेम में भी यही रणनीति अपनाई। ''
उन्होंने कहा, ''मैच खत्म होने के बाद मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकी। यह शानदार मुकाबला था। कई लंबी रैलियां हुईं और मैं उनमें से कई महत्वपूर्ण रैलियां जीतने में सफल रही, जो मेरे लिए बेहद अहम रहीं। ''
सिंधू ने अपने मुख्य कोच इरवानस्याह आदी प्रतामा, 'स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग' कोच वेन लोम्बार्ड, पूरे सहयोगी स्टाफ, अपने माता-पिता, पति वेंकट दत्ता साई और ससुराल पक्ष का भी साथ देने के लिए आभार जताया।
उन्होंने कहा, ''मेरे आसपास मौजूद सभी लोगों ने मेरा सही मार्गदर्शन दिया। मैं उन सभी की बहुत आभारी हूं। मुझे विश्वास है कि यह जीत आगे के टूर्नामेंटों के लिए मेरा आत्मविश्वास और बढ़ाएगी। ''
भाषा नमिता सुधीर
सुधीर
1907 1319 तोक्यो