प्रदर्शन के बाद से पुलिस ने 15 फर्ज़ी पोस्ट का खंडन किया; वायरल वीडियो के स्रोत का पता लगाया जा रहा
पवनेश
- 22 Jul 2026, 07:23 PM
- Updated: 07:23 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शन के बाद से अब तक कथित फर्जी खबरों और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट के कम से कम 15 मामलों का खंडन किया है। पुलिस के 'फैक्ट चेक' दल उनके मूल स्रोत का पता लगाने और गलत सूचना फैलाने वालों की पहचान करने के लिए सैकड़ों वायरल वीडियो और पोस्ट का विश्लेषण कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
जिन दावों का पुलिस ने अबतक खंडन किया है, उनमें 12 वर्षीय लड़की और एक महिला प्रदर्शनकारी पर पुलिस द्वारा हमला करना, कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लेना, पुलिस लाठीचार्ज के बाद भगदड़ में एक लड़की की मौत होना और पैलेट गन और कील लगे डंडों का इस्तेमाल करने के दावे शामिल हैं।
पुलिस और कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने नीट मुद्दे पर सोमवार को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है।
सोशल मीडिया पर सामने आए दर्जनों वीडियो में पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें दिखाई दे रही हैं, जिनमें लाठीचार्ज, आंसू गैस का इस्तेमाल और पत्थरबाजी भी शामिल है। इन घटनाओं के कारण दिल्ली पुलिस को आलोचना और बर्बरता के आरोपों का सामना करना पड़ा है।
पुलिस की ओर से तैयार की गई एक आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार से सोशल मीडिया पर प्रसारित कई दावे झूठे, गुमराह करने वाले, पुराने या संदर्भ से अलग हैं, जिसके चलते पुलिस बल को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के ज़रिए इनका खंडन करना पड़ा।
पुलिस ने उन दावों को खारिज किया कि महिलाओं पर हमले या पुलिस द्वारा हिंसा दर्शाने वाले कथित वीडियो प्रदर्शन स्थल के हैं। पुलिस ने कहा कि इनमें से कई वीडियो या तो प्रदर्शनों से संबंधित नहीं हैं या फिर भ्रामक संदर्भ के साथ प्रसारित किए गए हैं।
पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि जांचकर्ता एक वायरल ऑडियो क्लिप की भी जांच कर रहे हैं, जिसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की आवाज़ से कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी।
सूत्र ने कहा, "प्रदर्शनकारियों से शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील करने वाले अधिकारी के असली संदेश के साथ छेड़छाड़ की गई थी। पाकिस्तान में बैठे लोगों ने कथित तौर पर आवाज़ में बदलाव किया और उसमें मनगढ़ंत ऑडियो जोड़ दिया। यह वायरल क्लिप पूरी तरह से फर्ज़ी है और इसे पहले ही गलत बताया जा चुका है।"
सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने एक खास 'फैक्ट-चेक' टीम बनाई है, जो विरोध-प्रदर्शन से जुड़े हर वायरल वीडियो, फोटो और ऑडियो क्लिप की बारीकी से जांच कर रही है।
सूत्रों ने कहा, "यह टीम हर वीडियो के स्रोत की पुष्टि करती है, सभी संभावित पहलुओं से उसकी जांच करती है, उपलब्ध डेटाबेस को देखती है और 'डिजिटल फुटप्रिंट' का विश्लेषण करती है। जब भी कोई दावा झूठा या गुमराह करने वाला पाया जाता है, तो दिल्ली पुलिस के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल से एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाता है।"
पुलिस ने बताया कि जांचकर्ता उन सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो का भी विश्लेषण कर रहे हैं जिनमें विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले, पत्थरबाज़ी, पुलिस की गाड़ियों में तोड़-फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं दिखाई दे रही हैं।
इन वीडियो का मिलान सीसीटीवी फुटेज, एआई आधारित कैमरे और दूसरे डिजिटल सबूतों से किया जा रहा है, ताकि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा सके और जांच में मदद मिल सके।
अधिकारियों ने कहा कि जो लोग जानबूझकर ऐसी झूठी जानकारी फैलाएंगे जिसका मकसद दहशत फैलाना, जनता को गुमराह करना या कानून-व्यवस्था बिगाड़ना होगा, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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