कोलकाता: तसलीमा के जॉय गोस्वामी को मंच पर बुलाने का दर्शकों ने किया विरोध
राजकुमार
- 01 Aug 2026, 10:20 PM
- Updated: 10:20 PM
कोलकाता, एक अगस्त (भाषा) कोलकाता में शनिवार को एक सभागार में उस समय थोड़ी देर के लिए हंगामा हो गया, जब निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने मशहूर बांग्ला कवि जॉय गोस्वामी को मंच पर आसीन होने के लिए बुलाया। दर्शकों के एक वर्ग ने इसका विरोध किया। इससे तसलीमा के भाषण में कुछ देर के लिए व्यवधान उत्पन्न हुआ।
यह घटना तब हुई जब नसरीन के लगभग दो दशक बाद कोलकाता लौटने के मौके पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
भाषण देने के लिए बुलाए जाने के तुरंत बाद, नसरीन ने दर्शकों के बीच बैठे हाल के समय के बेहतरीन बांग्ला कवियों में से एक, गोस्वामी से मंच पर आने का अनुरोध किया।
जैसे ही साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता गोस्वामी अपनी सीट से उठकर मंच की ओर बढ़ने लगे, दर्शकों के एक हिस्से ने ज़ोरदार विरोध और शोर-शराबा शुरू कर दिया, जिससे उन्हें वापस मुड़कर अपनी सीट पर बैठना पड़ा।
अचानक हुए इस व्यवधान के कारण नसरीन कुछ पल के लिए चुपचाप माइक के पास खड़ी रहीं, जबकि ऑडिटोरियम नारों और तेज़ आवाज़ों से गूंज रहा था।
आयोजकों ने बार-बार दर्शकों से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा कई मिनटों तक जारी रहा।
अपनी चुप्पी तोड़ते हुए, नसरीन ने आखिरकार सीधे दर्शकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ''क्या मैं बोलूं? तो कृपया शांत हो जाएं और अपनी-अपनी जगह पर बैठ जाएं।''
उनकी अपील का अंततः असर हुआ और माहौल शांत हो गया, जिसके बाद उन्होंने अपना भाषण फिर से शुरू किया।
यह घटना उन भावनाओं को दर्शाती है, जो तसलीमा नसरीन के निर्वासन के वर्षों के दौरान जॉय गोस्वामी की कथित चुप्पी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उनकी नज़दीकी को लेकर अब भी बनी हुई हैं। माना जा रहा है कि इन्हीं कारणों से दर्शकों के एक वर्ग में नाराजगी थी।
विडंबना यह है कि जॉय गोस्वामी पहले सार्वजनिक रूप से तसलीमा नसरीन के लंबे निर्वासन पर खेद जता चुके हैं, उसके बाद भी यह व्यवधान हुआ।
गोस्वामी ने कहा था कि तसलीमा नसरीन को 2007 में अपनी रचनाओं के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद जब कोलकाता छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, तब वह उनकी पर्याप्त मदद न कर पाए और इसके लिए वह स्वयं को 'दोषी' मानते हैं।
हालांकि, दर्शकों में से कई लोग गोस्वामी को नसरीन के साथ मंच साझा करते हुए देखने के इच्छुक नहीं दिखे। नसरीन की कोलकाता यात्रा को प्रतीकात्मक 'घर वापसी' के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय के एक हॉल में नसरीन को नागरिक अभिनंदन किया था। इसके कुछ घंटों बाद आयोजित इस कार्यक्रम में नसरीन की 19 वर्षों के बाद कोलकाता की पहली यात्रा का जश्न मनाया गया।
अपने संबोधन में नसरीन ने अपनी वापसी को 'जिंदगी के उस हिस्से' में लौटना बताया जिसे वह पीछे छोड़ आई थीं। उन्होंने कहा कि उनकी घर वापसी इस बात का सबूत है कि 'अन्याय लंबा तो हो सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं रह सकता।'
उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन किसी भी लेखक को अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल करने के लिए देश छोड़ने पर मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
नसरीन नवंबर 2007 में शहर में अपनी मौजूदगी को लेकर हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद कोलकाता से चली गई थीं।
भाषा
राजकुमार पवनेश
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