भारत एवं कोट डी आइवर ने रक्षा, व्यापार और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की
नरेश
- 08 Oct 2026, 05:17 PM
- Updated: 05:17 PM
आबिदजान (कोट डी आइवर), आठ अक्टूबर (भाषा) भारत एवं कोट डी आइवर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यात्रा के दौरान रक्षा, आतंकवाद रोधी सहयोग, व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, कृषि और स्वास्थ्य सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
जयशंकर ने कोट डी आइवर को पश्चिमी अफ्रीका में भारत के ''प्रमुख साझेदारों'' में से एक बताया।
जयशंकर बुधवार को घाना से कोट डी आइवर पहुंचे। यह तीन अफ्रीकी देशों की उनकी यात्रा का दूसरा चरण है। इसके बाद वह इथियोपिया जाएंगे।
विदेश मंत्री ने बुधवार को आबिदजान में कोट डी आइवर के उप प्रधानमंत्री तेने बिराहिमा ओत्तारा से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी पर चर्चा की।
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, ''हमने आपसी विश्वास, क्षमता निर्माण और साझा हितों पर आधारित अपनी बढ़ती रक्षा साझेदारी पर चर्चा की।''
उन्होंने कहा, ''हमने प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और बढ़े संस्थागत आदान-प्रदान के जरिए रक्षा और आतंकवाद रोधी क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने के अवसरों पर विचार साझा किए।''
ओत्तारा कोट डी आइवर के रक्षा मंत्री भी हैं।
ओत्तारा ने कहा कि जयशंकर के साथ उनकी बातचीत ''कोट डी आइवर और भारत के बीच सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रही।''
उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ''यह बैठक शांति, सुरक्षा और विकास के लिए रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।''
इससे पहले, जयशंकर ने कोट डी आइवर की विदेश मामलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री नियाले काबा के साथ दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने से जुड़े मुद्दे पर बातचीत की। इस दौरान व्यापार, बुनियादी ढांचे, कृषि और स्वास्थ्य सेवा पर विशेष ध्यान दिया गया।
जयशंकर ने कहा कि उन्होंने ''व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचा, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और लोगों के बीच परस्पर संबंध'' समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत-कोट डी आइवर साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर काबा के साथ ''व्यापक चर्चा'' की।
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''हमने इस बात पर जोर दिया कि हमारा जन-केंद्रित सहयोग कोट डी आइवर की प्राथमिकताओं से संचालित होगा।''
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों पर अपने जुड़ाव को और गहरा करने पर भी चर्चा की।
जयशंकर ने यह यात्रा ऐसे समय में की है जब भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने, 'ग्लोबल साउथ' के साथ सहयोग बढ़ाने तथा व्यापार, निवेश, क्षमता निर्माण, रक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने का प्रयास कर रहा है।
'ग्लोबल साउथ' शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।
जयशंकर ने बुधवार को कोट डी आइवर में भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के पूर्व प्रतिभागियों के साथ बातचीत के दौरान कहा कि विकास साझेदारी अफ्रीका के साथ भारत के संबंधों का हमेशा से प्रमुख आधार रही है और भारत का सहयोग अफ्रीकी साझेदार देशों की जरूरतों एवं प्राथमिकताओं के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 1964 में शुरू हुआ आईटीईसी कार्यक्रम क्षमता निर्माण और अन्य देशों के साथ सहयोग के लिए भारत के सबसे महत्वपूर्ण मंचों में से एक बन गया है।
विदेश मंत्री ने कहा कि आईटीईसी कार्यक्रम के तहत अब 116 से अधिक साझेदार देशों के लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण के लिए हर साल लगभग 10,000 अवसर प्रदान किए जाते हैं और इसका पूरा खर्च भारत सरकार वहन करती है।
जयशंकर ने कहा कि कोट डी आइवर में पिछले 12 वर्ष के दौरान आईटीईसी के तहत लगभग 800 प्रशिक्षण स्थानों का उपयोग किया गया है, जबकि रक्षा क्षेत्र में 123 और असैन्य क्षेत्रों में 100 प्रशिक्षण स्थान उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
उन्होंने बताया कि आईटीईसी के तहत सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), डिजिटल शासन, लोक प्रशासन, बैंकिंग, वित्त, कृषि, ऊर्जा, कौशल विकास, रक्षा, सुरक्षा और आतंकवाद रोधी गतिविधियों समेत विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है।
विदेश मंत्री ने कहा कि क्षमता निर्माण भारत और कोट डी आइवर के पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कोट डी आइवर को पश्चिमी अफ्रीका में भारत के ''प्रमुख साझेदारों'' में से एक बताया।
जयशंकर ने कहा कि भारत कोट डी आइवर की निरंतर आर्थिक प्रगति, शासन व्यवस्था में बदलाव तथा रक्षा संबंधी लक्ष्यों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि कुशल मानव संसाधन, तकनीकी विशेषज्ञता और संस्थागत क्षमता संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भारत एक ''भरोसेमंद साझेदार'' है।
उन्होंने आईटीईसी कार्यक्रम के पूर्व प्रतिभागियों से भारत के साथ संपर्क बनाए रखने का आग्रह किया और कहा कि पूर्व प्रतिभागियों का नेटवर्क इस कार्यक्रम से निरंतर जुड़े रहने का एक ''स्थायी मंच'' बनना चाहिए।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत इस बारे में सुझावों का स्वागत करेगा कि आईटीईसी कार्यक्रमों को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है तथा इनमें किन नए क्षेत्रों को शामिल किया जाना चाहिए।
जयशंकर ने कहा कि भारत रक्षा और असैन्य दोनों क्षेत्रों में कोट डी आइवर की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में आवश्यक बदलाव करता रहेगा।
उन्होंने कहा, ''आईटीईसी की सफलता का आकलन अंततः केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि कितने लोगों को प्रशिक्षण दिया गया, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि कितना ज्ञान साझा हुआ, संस्थाएं कितनी मजबूत हुईं और प्रतिभागियों तथा उनके देशों में कितना उत्साह पैदा हुआ और क्या बदलाव आया।''
जयशंकर ने कहा कि आईटीईसी के पीछे भारत की सोच अफ्रीका के साथ सहयोग की ''गहरी प्रतिबद्धता'' से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाएं अफ्रीकी देशों की अपनी प्राथमिकताओं के अनुरूप होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए क्षमता निर्माण बेहद महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्री ने आईटीईसी के पूर्व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनमें से प्रत्येक भारत और कोट डी आइवर के बीच ''मित्रता का सेतु'' बन गया है।
जयशंकर ने कोट डी आइवर में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में आए बदलावों का उल्लेख किया।
उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के दौर में ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने, उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने, नागरिकों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देकर जीवन को सुगम बनाने, पासपोर्ट सेवाओं में प्रगति, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित कार्रवाई और संकट में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला।
विदेश मंत्री ने ब्रिक्स और जी20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान विभिन्न मुद्दों पर आम सहमति बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से जी20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को समूह की स्थायी सदस्यता दिलाने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया।
इससे पहले घाना में जयशंकर ने दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी को औषधि, स्वास्थ्य, खनन, रक्षा, रेलवे और डिजिटल क्षेत्रों समेत नए क्षेत्रों तक विस्तार देने के मुद्दे पर चर्चा की थी।
जयशंकर इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में क्षेत्रीय मिशन प्रमुखों के सम्मेलन की अध्यक्षता भी करेंगे। इसमें क्षेत्र में तैनात भारतीय राजनयिकों के शामिल होने की उम्मीद है।
भाषा सिम्मी नरेश
नरेश
0810 1717 आबिदजान