भूमि उपयोग क्षेत्र निर्धारण में सुधार और डेटा सत्यापन के कारण मास्टर प्लान-2032 रुका हुआ : उमर
रंजन
- 13 Feb 2026, 09:06 PM
- Updated: 09:06 PM
जम्मू, 13 फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुक्रवार को कहा कि भूमि उपयोग क्षेत्र निर्धारण में सुधार, राजस्व गांवों के साथ सीमा निर्धारण, जनता की आपत्तियों व सुझावों को शामिल करने व विभिन्न विभागों से डेटा एकत्र करने और सत्यापन के कारण जम्मू मास्टर प्लान-2032 की अंतिम मंजूरी में देरी हुई है।
इसके परिणामस्वरूप, जम्मू मास्टर प्लान के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र 652.33 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 777.84 वर्ग किलोमीटर हो गया है, जिसमें 350 राजस्व गांव शामिल हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक चंद्र प्रकाश के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए विधानसभा में कहा कि जम्मू मास्टर प्लान-2032 का संशोधन वर्तमान में सरकार के विचाराधीन है।
इस मास्टर प्लान की शुरुआत 2021 में हुई थी।
अब्दुल्ला ने लिखित जवाब में कहा, "अंतिम मंजूरी में देरी के कारण भूमि उपयोग के गलत जोनिंग और राजस्व गांवों के साथ सीमा निर्धारण में सुधार, जनता की स्थायी आपत्तियों व सुझावों को शामिल करना और राजस्व एवं वन विभागों से लंबित जानकारियां सहित कई विभागों से डेटा प्राप्त करने और सत्यापित करने में लगने वाला समय है।"
उन्होंने कहा कि जम्मू मास्टर प्लान-2032 की समीक्षा के लिए मंजूरी 18 अक्टूबर, 2021 को जम्मू-कश्मीर विकास अधिनियम, 1970 की धारा 3 के तहत दी गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा, "जम्मू विकास प्राधिकरण और नगर एवं ग्रामीण योजना संगठन के बीच 28 जनवरी, 2021 को संदर्भ की शर्तों पर हस्ताक्षर किए गए थे।"
उन्होंने बताया कि संशोधित मसौदा मास्टर प्लान 14 अक्टूबर, 2024 से तीन जनवरी, 2025 तक 80 दिनों के लिए सार्वजनिक किया गया था और इस दौरान 143 आपत्तियां व सुझाव प्राप्त हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा, "16 जनवरी, 2025 के सरकारी आदेश के तहत एक जांच बोर्ड का गठन किया गया था और 23 जनवरी, 2025 को जन सुनवाई की गई थी।"
उन्होंने कहा कि जन सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
भाजपा विधायक युदवीर सेठी ने दावा किया कि सरकार के डेढ़ साल सत्ता में रहने के बावजूद जम्मू मास्टर प्लान-2032 को अब तक मंजूरी नहीं मिली है।
उन्होंने कहा, "जब सरकार ने प्रक्रिया पूरी कर ली है, तो मंत्रिमंडल इस पर चुप क्यों बैठा है? वे इसे मंजूरी देने में नाकामयाब रहे हैं।"
भाषा जितेंद्र रंजन
रंजन
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