प्रधानमंत्री मोदी का उद्योग जगत से निवेश बढ़ाने, शोध पर अधिक खर्च करने का आह्वान
प्रेम
- 03 Mar 2026, 12:49 PM
- Updated: 12:49 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को उद्योग जगत से निवेश बढ़ाने, उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने और शोध एवं विकास (आरएंडडी) पर अधिक खर्च करने का आह्वान किया, ताकि विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से मिलने वाले अवसरों का पूरा लाभ उठाया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर आयोजित दूसरे वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा, "अनुसंधान में कटौती के दिन अब खत्म हो चुके हैं। हमें शोध एवं विकास गतिविधियों में पर्याप्त निवेश करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे उत्पाद वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें।"
उन्होंने कहा, "अब हमारे पास आगे बढ़ने के अवसर हैं, लिहाजा हमारा एक ही मंत्र होना चाहिए– गुणवत्ता, गुणवत्ता और गुणवत्ता।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अनेक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिससे निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसर खुले हैं। ऐसे में गुणवत्ता से कोई भी समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया विश्वसनीय और जुझारू विनिर्माण साझेदारों की तलाश में है और भारत के पास यह भूमिका निभाने का एक मजबूत अवसर है।
मोदी ने कहा, "हमारी दिशा स्पष्ट है। हमारा संकल्प स्पष्ट है। अधिक निर्माण करें, अधिक उत्पादन करें, अधिक जुड़ाव बनाएं और अब अधिक निर्यात करें।"
प्रधानमंत्री ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समय हो रहे बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि अब बाजार केवल लागत पर केंद्रित नहीं हैं, बल्कि टिकाऊ विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।
इस संदर्भ में उन्होंने 'कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण मिशन' को एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि स्वच्छ प्रौद्योगिकी में शुरुआती निवेश करने वाले उद्योगों को आने वाले वर्षों में उभरते बाजारों में बेहतर अवसर मिलेंगे।
प्रधानमंत्री ने बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक को भारत की वृद्धि रणनीति के मूल स्तंभ बताते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष के बजट में इन प्राथमिकताओं के समर्थन के लिए रिकॉर्ड स्तर का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया गया है।
उन्होंने कहा कि अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था के कारण भारत विश्व के लिए उम्मीद की एक किरण के रूप में उभर रहा है और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में हो रहे बदलाव के बीच तीव्र आर्थिक विकास 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करने की आधारशिला बन चुका है।
भाषा प्रेम
प्रेम
प्रेम
0303 1249 दिल्ली