पश्चिम एशिया की स्थिति से प्रभावित गामीण क्षेत्रों के लिए केंद्र पैकेज जारी करे : भाकपा
माधव
- 11 Mar 2026, 05:39 PM
- Updated: 05:39 PM
नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) राज्यसभा में विपक्ष के एक सदस्य ने पश्चिम एशिया में तनाव के कारण भारत के गामीण क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर बुधवार को चिंता जतायी और सरकार से एक विशेष पैकेज जारी करने की मांग की।
भाकपा सदस्य संदोष कुमार पी ने ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर उच्च सदन में हुई चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण बड़ी मात्रा में बासमती चावल विभिन्न बंदरगाहों पर फंसा हुआ है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार कई अन्य कृषि उत्पाद भी रास्ते में फंसे हुए हैं, जिन्हें विदेशों में भेजा जा रहा था।
भाकपा सदस्य ने कहा कि ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा प्रभाव भारत के किसानों पर पड़ेगा और उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि ऐसे किसानों की मदद के लिए सरकार को एक विशेष पैकेज की घोषणा करनी चाहिए और उनकी रक्षा के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पश्चिम एशिया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कोई टिप्प्णी नहीं करने का आरोप लगाया।
उन्होंने सरकार से इस मंत्रालय को बजट में अधिक आवंटन करने की मांग की।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सदस्य महुआ माझी ने झारखंड के किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी स्थिति खराब है और पिछले कई साल से राज्य में श्रमिकों को मनरेगा के तहत काम नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि अब मनरेगा का स्वरूप भी बदला जा रहा है जिससे स्थिति और खराब हो सकती है।
उन्होंने कहा कि केंद्र पर झारखंड की कोयले रॉयल्टी बाकी है जिसे जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ भी केंद्र को सहयोग करना चाहिए।
माकपा सदस्य वी शिवदासन ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उसकी नीतियों के कारण ही घरेलू रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इस सरकार को आम लोगों की नहीं बल्कि कारपोरेट जगत की चिंता है और उसे करोड़ों रुपये की मदद दी जा रही है।
माकपा सदस्य ने पशुओं के हमले में लोगों के मारे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इस पर रोक के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों पर खर्च नहीं कर जानवरों पर खर्च कर रही है।
आईयूएमएल सदस्य हारिस बीरन ने मनरेगा के स्थान पर केंद्र द्वारा लाए गए नए कानून का जिक्र करते हुए कहा कि चार विधानसभाओं ने इसे वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार के नियमों के कारण मनरेगा श्रमिक प्रभावित होते हैं और उन्हें उनका पैसा मिलने में दिक्कत हो रही है।
भाषा
अविनाश माधव
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