अतिक्रमणकारियों को हिरासत में लेने के खिलाफ स्थानीय लोगों ने वन कार्यालय में तोड़फोड़ की, कई घायल
सुरेश
- 17 Apr 2026, 09:56 PM
- Updated: 09:56 PM
गुवाहाटी/कोकराझार, 17 अप्रैल (भाषा) असम के चिरांग जिले में वन भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लिये जाने के बाद एक भीड़ ने वन विभाग के एक कार्यालय में तोड़फोड़ की, जिसमें वनकर्मी समेत कई लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, एहतियातन चिरांग और उससे सटे जिले कोकराझार में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गईं, ताकि भड़काऊ संदेशों या अफवाहों के प्रसार को रोका जा सके और स्थिति न बिगड़े।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि महिलाओं सहित हिरासत में लिये गए लोगों के साथ वनकर्मियों ने मारपीट की। प्रदर्शनकारियों में अधिकांश आदिवासी समुदाय से थे, जिन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने रुनीखाटा वन रेंज कार्यालय में तोड़फोड़ करने के अलावा परिसर के भीतर खड़े सरकारी वाहनों में आग भी लगा दी। यह परिसर भूटान सीमा के पास और स्थानीय पुलिस थाने से महज कुछ मीटर की दूरी पर स्थित है।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मौके पर पहुंचने और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद स्थिति पर काबू पा लिया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और हवा में गोलियां भी चलाईं।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "कल वनकर्मियों ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया था और पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि, आज सुबह गुस्साई भीड़ इकट्ठा हो गई और उसने कर्मियों तथा वन कार्यालय पर पथराव किया। इसके साथ ही कुछ वाहनों में आग भी लगा दी गई।"
उन्होंने कहा, "अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाए गए और अब स्थिति नियंत्रण में है।"
अधिकारी के अनुसार, इस घटना में चार से पांच वनकर्मी और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की सूचना है। हालांकि, उनकी सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने हथियार और गोला-बारूद लूटे जाने के दावों पर कहा, "हम इन आरोपों की जांच करेंगे।"
एक वनकर्मी ने संवाददाताओं से कहा कि इस हंगामे में उसके कुछ सहकर्मी घायल हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया, "भीड़ ने वन कार्यालय और आवासीय क्वार्टर में तोड़फोड़ की और परिसर में खड़े वाहनों में आग लगा दी।"
इस बीच, एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया कि चिरांग जिले और आसपास के इलाकों में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं फैलाए जाने की खबरें हैं।
राज्य सरकार के राजनीतिक विभाग के आदेश में कहा गया, "सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से भड़काऊ संदेश और अफवाहें फैलने की आशंका है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के हित में चिरांग और कोकराझार जिलों में सभी सेवा प्रदाताओं की इंटरनेट/मोबाइल डेटा सेवाएं तत्काल प्रभाव से निलंबित की जाती हैं।"
आदेश में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान 'वॉयस कॉल' और लैंडलाइन आधारित ब्रॉडबैंड सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी।
एक अधिकारी ने बताया कि चिरांग जिले में भारत-भूटान सीमा पर स्थित सिखना राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाले रिपु चिरांग आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध कटाई और भूमि साफ करने के आरोप में वनकर्मियों द्वारा कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लेने के बाद तनाव पैदा हो गया।
भाषा खारी सुरेश
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