ई-फार्मेसी के विरुद्ध आहूत हड़ताल का कर्नाटक में मिला-जुला असर
सुरेश
- 20 May 2026, 06:49 PM
- Updated: 06:49 PM
बेंगलुरु, 20 मई (भाषा) ऑल इंडिया केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (एआईओसीडी) द्वारा ई-फार्मेसियों के खिलाफ बुधवार को आहूत देशव्यापी हड़ताल का कर्नाटक में मिला-जुला असर देखने को मिला। राज्य के कई जिलों में कुछ दवा दुकानें बंद रहीं, तो कुछ ने अपनी सेवाएं पूर्ववत जारी रखीं।
यह बंद ऑनलाइन फार्मेसियों और औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के तहत नियामक मानदंडों के कथित उल्लंघन के खिलाफ एआईओसीडी द्वारा आहूत बंद का हिस्सा था।
बेंगलुरु में बंद के समर्थन में कई दवा दुकानें बंद रहीं, जबकि कुछेक ने ग्राहकों को सामान्य सेवाएं देना जारी रखा। शहर के हलासुरु और कुछ अन्य इलाकों में मेडिकल दुकानें सामान्य रूप से काम करती रहीं।
हलासुरु इलाके में स्थित पूजा मेडिकल्स के एक कर्मचारी ने कहा कि उनका कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है और उन्हें अपने संबंधित संगठन से हड़ताल के बारे में कोई सूचना नहीं मिली है।
हालांकि, इस हड़ताल में दक्षिण कन्नड़, उडुपी, गडग, तुमकुरु, बागलकोट और शिवमोग्गा जैसे जिलों में भी भागीदारी देखी गई, जहां कई दवा दुकानें दिन भर बंद रहीं।
मैसूरु में कुछ दवा विक्रेताओं ने विरोध के प्रतीक के रूप में काली पट्टियां बांधकर अपनी दुकानें खोलीं।
हालांकि, बृहत् बेंगलुरु केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन (बीबीसीडीए) ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह बंद में भाग नहीं लेगा और उससे संबद्ध दवा दुकानें जनहित में खुली रहेंगी।
एक बयान में कहा गया था, ''बीस मई को कोई बंद नहीं रहेगा और दुकानें सामान्य रूप से खुली रहेंगी। सभी दवा दुकानें जनता को सेवाएं प्रदान करने के लिए खुली रहेंगी।''
हालांकि, कर्नाटक केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन (केसीडीए) के अध्यक्ष आर रघुनाथ रेड्डी ने दावा किया कि कुछ दवा दुकानों को छोड़कर, राज्य भर के कई केमिस्ट ने हड़ताल में भाग लिया है।
उन्होंने कहा कि ई-फार्मेसियों द्वारा औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के बार-बार उल्लंघन के कारण विरोध प्रदर्शन अपरिहार्य हो गया है।
रेड्डी ने कहा, ''अधिनियम के तहत ऑनलाइन फार्मेसियों के माध्यम से बिक्री की अनुमति नहीं है। हमारे पास उच्च न्यायालय के आदेश भी हैं, लेकिन उनका पालन नहीं किया जा रहा है।''
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ई-फार्मेसियां भारी छूट दे रही हैं, जिससे 16 से 20 प्रतिशत के निर्धारित 'मार्जिन' (मुनाफा) ढांचे में गड़बड़ी हो रही है और छोटे खुदरा विक्रेताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
भाषा तान्या सुरेश
सुरेश
2005 1849 बेंगलुरु