धार के इमामबाड़े की चाबियां 24 घंटे में मुस्लिम समुदाय के याचिकाकर्ता को सौंपी जाएं: उच्च न्यायालय
जोहेब
- 25 Jun 2026, 08:43 PM
- Updated: 08:43 PM
इंदौर, 25 जून (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने धार के विवादित सरकारी इमामबाड़े में मुहर्रम के दौरान ताजिया निर्माण के लिए दायर याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को प्रशासन को निर्देश दिया कि इस भवन की चाबियां समुदाय के एक याचिकाकर्ता को 24 घंटे के अंदर सौंपी जाएं।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं और उनके समुदाय को पांच दिनों के लिए इमामबाड़े के उपयोग की अनुमति देते हुए कहा कि इससे राज्य सरकार के कानूनी हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इमामबाड़ा मुस्लिम समुदाय का सभा-भवन होता है जिसका उपयोग विशेष रूप से मुहर्रम के दौरान धार्मिक सभाओं और मातमी कार्यक्रमों के लिए किया जाता है।
इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए कहा,''संबंधित प्राधिकारी या अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) को निर्देश दिया जाता है कि वह याचिकाकर्ता सिद्दीक को धार के किले में स्थित सरकारी इमामबाड़े की चाबियां एक दिन के भीतर सौंप दें। इसके साथ ही, याचिकाकर्ता को भी निर्देश दिया जाता है कि ताजिया का कार्यक्रम पूरा होने के बाद वह एक जुलाई को दोपहर 12 बजे तक एसडीओ को इमामबाड़े की चाबियां लौटा दें।''
प्रशासन ने अगस्त 2025 में धार के हटवाड़ा स्थित सरकारी इमामबाड़े को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को सौंप दिया था।
उस समय अधिकारियों ने बताया था कि एक अनुविभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) की अदालत द्वारा इमामबाड़े को पीडब्ल्यूडी की संपत्ति घोषित किए जाने और ताजिया समिति की अपील संभाग आयुक्त स्तर पर खारिज होने के बाद यह कार्रवाई की गई।
याचिकार्ताओं में शामिल सिद्दीक ने उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर करके इस कार्रवाई को चुनौती दी है। अदालत में पेश एक अन्य याचिका में अय्या अंसारी उर्फ जेबरान अंसारी और बाबू चाचा उर्फ जाकिर मोहम्मद ने सरकारी इमामबाड़े में प्रत्येक वर्ष मोहर्रम के दौरान 70 दिनों के लिए ताजिया निर्माण की अस्थायी अनुमति देने और पारंपरिक किराया अथवा अस्थायी कब्जा शुल्क स्वीकार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दावा किया कि धार के सरकारी इमामबाड़े में ताजिया बनाने की परंपरा देश की आजादी से पहले रियासतकाल से शुरू हुई थी।
उच्च न्यायालय में बहस के दौरान राज्य सरकार ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय को ताजिया निर्माण के लिए छोटा इमामबाड़ा और जमातखाना वैकल्पिक स्थल के रूप में उपलब्ध कराए गए हैं।
खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों और तथ्यों पर गौर करते हुए कहा,''मौजूदा याचिका लंबित है और इसमें पक्षों के अधिकारों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। इसके साथ ही, याचिकाकर्ताओं के वकील ने वचन दिया है कि इमामबाड़ा एक जुलाई को प्रतिवादियों/संबंधित प्राधिकारी को निश्चित रूप से सौंप दिया जाएगा। इन हालात में हम याचिकाकर्ताओं की अंतरिम राहत की गुहार स्वीकार करने के पक्ष में हैं।''
अदालत ने निर्देश दिया कि सरकारी इमामबाड़ा याचिकाकर्ताओं के कब्जे में रहने के दौरान उसमें किसी प्रकार का निर्माण, परिवर्तन या किसी हिस्से को हटाने का कार्य नहीं किया जाएगा और संपत्ति को साफ-सुथरी अवस्था में राज्य सरकार को लौटाया जाएगा।
खंडपीठ ने इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का भी निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तारीख तय की।
भाषा हर्ष जोहेब
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