भाजपा चुनाव के वादे पूरे कर रही है, शुभेंदु के नेतृत्व में 'सोनार बांग्ला' आकार ले रहा है:अमित शाह
राजकुमार
- 06 Jul 2026, 10:35 PM
- Updated: 10:35 PM
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, छह जुलाई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा कर रही है, जिसमें समान नागरिक संहिता (यूसीसी)की दिशा में कदम उठाना, घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई और अपराध रोकने के लिए कड़े उपाय करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में 'सोनार बांग्ला' का दृष्टिकोण साकार हो रहा है।
शाह ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)सरकार की नीतिगत पहलों को दिवंगत नेता की वैचारिक विरासत का विस्तार बताया। उन्होंने नागरिकता, राष्ट्रीय एकता, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को मुखर्जी के विचारों से जोड़ा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फुट ऊंची प्रतिमा की आधारशिला रखी। उन्होंने इस अवसर पर घोषणा की कि पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा कि घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के तहत अर्हता रखने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए भाजपा की प्रतिबद्धता को दोहराया।
शाह ने कहा, ''हम बंगाल चुनाव के दौरान अपने 'संकल्प पत्र' में किए गए वादों को पूरा कर रहे हैं।''
राज्य की भाजपा सरकार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में 'सोनार बांग्ला' बनाने का संकल्प पूरा होगा।''
शाह ने मुखर्जी की राजनीतिक विरासत का ज़िक्र करते हुए इस मौके को भावुक करने वाला बताया और कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री के योगदान को दशकों तक जान-बूझकर नजरअंदाज किया गया।
उन्होंने कहा, '' गत 63 सालों से कोशिश की जा रही है कि हम श्यामा प्रसाद मुखर्जी और उनके योगदान को भुला दें।''
शाह ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के गृह राज्य में 125 फुट ऊंची प्रतिमा लगाना उन्हें उचित श्रद्धांजलि होगी, जिनके विचार आज ''देश के बड़े हिस्से में शासन-व्यवस्था को आकार दे रहे हैं''।
उन्होंने कहा, ''आज उनकी 125वीं जयंती के मौके पर पश्चिम बंगाल में उनकी 125 फुट ऊंची प्रतिमा की आधारशिला रखी गई, जो उनकी स्थायी विरासत के प्रति एक श्रद्धांजलि है।''
भाजपा की वैचारिक विरासत को रेखांकित करते हुए शाह ने कहा कि मुखर्जी द्वारा शुरू किया गया राजनीतिक आंदोलन एक मामूली ताकत से बढ़कर देश की प्रमुख राजनीतिक धारा बन गया है।
उन्होंने कहा, ''डॉ. मुखर्जी द्वारा स्थापित जनसंघ आज देश के दो-तिहाई से ज्यादा भौगोलिक क्षेत्र और आबादी में उनकी नीतियों के अनुसार भाजपा के रूप में काम कर रहा है।''
शाह ने इस अवसर पर बंगाल की भाजपा सरकार की नीतियों को रेखांकित करते हुए कहा, ''राज्य में यूसीसी लागू करने का रास्ता साफ करने के लिए एक समिति गठित की गई है।''
उन्होंने 'पश्चिम बंगाल असमाजिक गतिविधियों पर अंकुश (संशोधन) विधेयक -2026' के विधानसभा से पारित होने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इस बात का सबूत है कि सरकार कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटने के अपने वादे पर काम कर रही है।
शाह ने कहा, ''हमने अपराधियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का वादा किया था और यह कानून उस वादे को पूरा करने की दिशा में पहला कदम है।''
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, ''घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।''
उन्होंने कहा, ''हम हर घुसपैठिये की पहचान करेंगे और देश को सुरक्षित करेंगे''।
महिला मतदाताओं को लक्षित करते हुए शाह ने कहा कि हाल में बना 'दुर्गा सुरक्षा दस्ता' पूरे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा मजबूत होगी।
शाह के भाषण का एक बड़ा हिस्सा नेहरू-लियाकत समझौते को लेकर आजाद भारत की पहली कैबिनेट से मुखर्जी के इस्तीफे के बारे में बताने पर केंद्रित था। यह घटना जनसंघ के संस्थापक के बारे में भाजपा के विमर्श का अहम हिस्सा रही है।
उन्होंने कहा, ''आज मेरे जैसे कई लोगों के लिए भावुक करने वाला दिन है। डॉ. मुखर्जी ने कश्मीर को भारत के साथ एकीकृत करने के लिए अपनी जान दे दी।''
शाह ने नेहरू-लियाकत समझौते के प्रति मुखर्जी के विरोध को याद करते हुए कहा कि पूर्व मंत्री ने इसे पूर्वी पाकिस्तान में रह गए हिंदुओं के साथ अन्यायपूर्ण माना था।
उन्होंने कहा, ''मैंने पहली कैबिनेट से उनका इस्तीफा पत्र देखा है। जब डॉ. मुखर्जी ने समझौते का अध्ययन किया, तो उन्होंने पाया कि इसमें भारत में मुसलमानों के रहने की बात तो थी, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं की चिंताओं पर कोई बात नहीं की गई थी। उन्होंने इसे एकतरफा बताया और मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने का फैसला किया।''
शाह ने अपने संबोधन के दौरान दोहराया कि मुखर्जी का मानना था कि इस समझौते में भारत में मुसलमानों की चिंताओं का तो ध्यान रखा गया, लेकिन पाकिस्तान में हिंदुओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
उस घटना और भाजपा की मौजूदा नीतियों के बीच संबंध बताते हुए शाह ने कहा कि पार्टी ने सीएए के जरिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी की चिंताओं पर कदम उठाया है।
उन्होंने कहा, ''आज उसी पार्टी की सरकार सताए हुए हिंदुओं को नागरिकता देने के लिए सीएए लेकर आई है।''
शाह ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मौजूद बड़ी संख्या में शरणार्थियों को लक्षित करते हुए कहा कि नागरिकता देने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। उन्होंने कहा, ''आज मैं इस मंच से कहना चाहता हूं कि हम नागरिकता देने की बाकी औपचारिकताएं भी जल्द ही पूरी करेंगे, क्योंकि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार है।''
केंद्रीय गृहमंत्री ने अनुच्छेद 370 को हटाने का भी जिक्र किया और इसे मुखर्जी से जुड़ी एक और लंबे समय से चली आ रही इच्छा को पूरा करने जैसा बताया।
उन्होंने कहा, '' (प्रधानमंत्री नरेन्द्र)मोदी जी ने डॉ. मुखर्जी के संकल्प को पूरा किया और अनुच्छेद 370 को खत्म किया। आज कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।''
केंद्रीय गृहमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि एक के बाद एक आई सरकारों ने कभी भी 1953 में कश्मीर में मुखर्जी की मौत की ठीक से जांच नहीं होने दी।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने कभी भी रहस्यमय परिस्थितियों में डॉ. मुखर्जी की मौत की जांच नहीं होने दी।
शाह ने कहा कि मुखर्जी का मानना था कि भारत का विकास मॉडल पश्चिम से उधार लेने के बजाय उसकी अपनी सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, ''जब मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की थी, तो उन्होंने संकल्प लिया था कि केवल सरकार बदलने से भारत का गौरव नहीं बढ़ेगा। आजाद भारत की नीतियां भारत की अपनी मिट्टी की खुशबू से तैयार होनी चाहिए, जिन पर पश्चिम की छाया न हो।''
उन्होंने कहा कि मोदी के शासन मॉडल में वह दृष्टिकोण इंगित होता है।
शाह ने कहा, ''इस सिद्धांत को अपनाते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की नींव को मज़बूत करने, 2047 तक पूरी तरह विकसित भारत बनाने और यह सुनिश्चित करने की यात्रा शुरू की है कि हमारी संस्कृति का परचम पूरी दुनिया में सबसे ऊंचा लहराए।''
भाषा धीरज राजकुमार
राजकुमार
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