वायनाड सुरंग परियोजना स्थल पर भूस्खलन में तीन लोगों की मौत, पांच लापता
अविनाश
- 07 Jul 2026, 08:50 PM
- Updated: 08:50 PM
वायनाड (केरल), सात जुलाई (भाषा) केरल के वायनाड के मेप्पाडी पंचायत क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत वाली सुरंग परियोजना स्थल पर खुदाई कर निकाली गई मिट्टी का ढेर बारिश के कारण ढह जाने के कारण कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 10 अन्य घायल हो गए और पांच लोग अब भी लापता हैं।
राज्य के दो मंत्रियों ने इस भूस्खलन को "मानव निर्मित" आपदा बताया।
अधिकारियों ने बताया कि यह भूस्खलन कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास हुआ, जहां कोझिकोड और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली सुरंग सड़क परियोजना का काम चल रहा था। यह दुर्घटना स्थल मुंडक्कई-चूरलमाला गांवों के पास है, जहां 2024 में भारी भूस्खलन से कई लोगों की जान चली गई थी।
घटना से जुड़े एक वीडियो में मीनाक्षी पुल के पास जमा मिट्टी का बड़ा ढेर बारिश के कारण अचानक नीचे खिसकता हुआ दिखाई दिया। मिट्टी का ढेर नीचे आने से पेड़ गिर गए और निर्माण स्थल पर लगाए गए धातु तथा कपड़े के अवरोधक बह गए।
जिला प्रशासन ने एक बयान में बताया कि इस आपदा से कुल 18 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से तीन लोगों की मौत हो गई है और 10 लोगों का अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा पांच अन्य लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि पास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि घटना के समय निर्माण स्थल पर कोई भी मजदूर मौजूद नहीं था और मलबे में जिनके फंसे होने की आशंका है, वे इंजीनियर और सुरक्षाकर्मी हैं।
उन्होंने कहा, ''अगर वहां (सुरंग परियोजना का) काम चल रहा होता, तो यह और भी बड़ी त्रासदी हो सकती थी।''
बयान में कहा गया कि निर्माण स्थल पर खड़ी एक निजी बस, जिसका इस्तेमाल श्रमिकों को लाने-ले जाने के लिए किया जाता था, भूस्खलन के कारण पास की नदी में बह गई।
मलबे के नीचे फंसे लोगों का पता लगाने के लिए राज्य पुलिस के खोजी कुत्तों को तैनात किया गया है।
बयान में यह भी कहा गया है कि पुल के दोनों ओर फंसे आदिवासी समुदायों के सदस्यों सहित स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के लिए 'मुंडक्कई वन स्टेशन' और 'चूरलमाला चर्च हॉल' में व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने कहा, "यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। बचाव प्रयास जारी हैं।"
मुख्यमंत्री ने बताया कि आवश्यक बचाव दल क्षेत्र में पहुंच रहे हैं तथा पुलिस के साथ-साथ दमकल एवं बचाव कर्मियों को पहले ही मौके पर तैनात किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, त्रिशूर में रक्षा बल की एक टीम को भी तैयार रखा गया है और आवश्यकता पड़ने पर उसे घटना स्थल पर तैनात किया जा सकता है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि तलाश और बचाव अभियान के लिए सभी आवश्यक प्रणालियां जल्द से जल्द उपलब्ध करा दी जाएंगी।
सतीशन ने यहां पत्रकारों से कहा कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मंत्री पी. के. बशीर और जिलाधिकारी ने ठेकेदारों को क्षेत्र में बड़ी मात्रा में जमा मिट्टी को हटाने के निर्देश काफी पहले ही दे दिए थे।
केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के कार्यालय में अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, "हालांकि, ठेकेदारों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।"
एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम संबंधी उचित चेतावनी जारी नहीं होना भूस्खलन का कारण नहीं था, बल्कि अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार समय पर मिट्टी नहीं हटाए जाने की वजह से यह घटना हुई।
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला और कृषि मंत्री टी सिद्दीकी ने इस घटना को मानव निर्मित आपदा करार दिया है।
सिद्दीकी ने पत्रकारों से कहा, "यह प्राकृतिक भूस्खलन नहीं है। यह मानव निर्मित भूस्खलन है, जो खुदाई के बाद निकाली गई मिट्टी को अवैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा करने के कारण हुई।"
मंत्री ने कहा कि इस संबंध में पहले भी चिंताएं जताई गई थीं। उन्होंने बताया कि स्थिति का आकलन करने, जमा की गई मिट्टी को हटाने और जरूरत पड़ने पर काम रोकने के निर्देश जारी किए गए थे।
चेन्निथला ने कोल्लम में पत्रकारों से कहा कि यदि निर्माण कंपनी ने जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप खुदाई से निकली भारी मात्रा में मिट्टी को हटा दिया होता, तो इस त्रासदी को टाला जा जा सकता था।
उत्तरी क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक के कार्तिक ने मौके का दौरा कर पत्रकारों को बताया, ''घायलों में एक पुलिस उप-निरीक्षक भी शामिल हैं जो बचाव अभियान के लिए मौके पर पहुंचे थे। इसके अलावा, क्षेत्र की एक महिला निवासी भी घायलों में शामिल है।''
कार्तिक ने कहा कि बचावकर्मी मलबे के नीचे दबी सड़क को साफ करने का भी प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि भूस्खलन के दूसरी ओर कई लोग फंसे हुए हैं।
उन्होंने बताया कि मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई इसके नीचे तो नहीं फंसा है। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान रात भर जारी रहेगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को जिले में 'रेड अलर्ट' जारी किया, जहां दिन के समय मानंतवाडी और वायथिरी क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। वायनाड में सुबह करीब 11 बजे कल्लाडी सुरंग परियोजना स्थल पर हुए भूस्खलन के बाद दोपहर 12.30 बजे यह अलर्ट जारी किया गया।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने वायनाड में हुए भूस्खलन को "दुखद और चौंकाने वाला" बताया। इसके साथ ही उन्होंने यह पता लगाने के लिए जांच की मांग की कि क्या एहतियाती कदम उठाने में किसी तरह की चूक या "आपराधिक लापरवाही" के कारण यह घटना हुई।
विजयन ने एक बयान में कहा कि मलबे के नीचे फंसे लोगों को बचाने और घायलों को मुफ्त चिकित्सा उपचार प्रदान करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने सरकार और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा किए जा रहे बचाव प्रयासों को समर्थन दिया।
विजयन ने इस आपदा में अपनी जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और सरकार से उनके परिजनों को तुरंत वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।
मेप्पाडी पुलिस ने भूस्खलन की घटना के बाद मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस संबंध में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, भूस्खलन सुबह 11 बजे से 11.30 बजे के बीच मीनाक्षी पुल के पास हुआ।
भाषा प्रचेता अविनाश
अविनाश
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