राज्यसभा में सभापति धनखड़ ने कार्यस्थगन प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष के सदस्यों को लिया आड़े हाथ
माधव ब्रजेन्द्र
- 26 Jul 2024, 06:52 PM
- Updated: 06:52 PM
नयी दिल्ली, 26 जुलाई (भाषा) राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के कुछ सदस्यों द्वारा कर्नाटक में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नियम 267 के तहत चर्चा कराये जाने पर जोर दिये जाने के कारण उन्हें आड़े हाथ लेते हुए कहा कि सभापति द्वारा इस बारे में स्पष्ट व्यवस्था दिये जाने के बावजूद आसन पर दबाव बनाना ठीक नहीं है।
उच्च सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद शून्यकाल में सभापति धनखड़ ने कहा कि उन्हें आज भाजपा सदस्य ईरण्ण कडाडी, सुधांशु त्रिवेदी, नरेश बंसल और बृजलाल के नियम 267 के तहत चार नोटिस मिले हैं। यह नोटिस कर्नाटक में महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति कार्पोरेशन में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मिले हैं।
उन्होंने कहा कि यह सभी नोटिस नियम 267 के बारे में उनके द्वारा दिये गये स्पष्ट निर्देशों की स्पष्ट अनदेखी है। सभापति ने कहा कि उन्होंने इस बारे में सदन में स्पष्ट व्यवस्था दी थी और उसके बाद पिछले दो दिन कार्य स्थगन प्रस्ताव के कोई नोटिस नहीं आये।
धनखड़ ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्य कडाडी ने एक ऐसे मुद्दे पर नियम 267 के तहत नोटिस दिया जिसे वह शून्यकाल में पहले ही उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि कोई मुद्दा सदस्यों के लिए अति महत्वपूर्ण हो सकता है, फौरी महत्व का हो सकता है किंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि इसे नियम 267 के तहत सदन में उठाये।
इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के कई सदस्यों द्वारा शोरशराबा करने के बीच सभापति ने संसदीय कार्यमंत्री किरेन रीजीजू को बोलने का अवसर दिया। रीजीजू ने कहा कि यद्यपि सभापति ने नियम 267 के नोटिसों के बारे में स्पष्ट व्यवस्था दी है किंतु यह एक अत्यंत महत्व का विषय जिससे कुछ सदस्य आंदोलित हैं और इसीलिए उन्होंने यह नोटिस दिया।
सभापति ने रीजीजू को टोकते हुए कहा कि वह नोटिस पर न बोलें क्योंकि ठीक इसी तरह उन्होंने पूर्व में सदन में नेता प्रतिपक्ष को भी इसी कारण नहीं बोलने दिया था।
इसके उपरांत सत्ता पक्ष के सदस्य शांत होकर बैठ गये तथा विभिन्न सदस्यों ने आसन की अनुमति से शून्यकाल में लोक महत्व के विषय उठाने शुरू कर दिये।
सभापति ने बाद में शून्यकाल के दौरान कडाडी को कर्नाटक में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलने का अचसर दिया। विपक्ष, खासकर कांग्रेस के सदस्यों ने इसका जोरदार विरोध किया। विरोध और हंगामे के बीच कडाडाी ने कन्नड में अपनी बात रखी।
भाषा माधव