औद्योगिक शराब के विनियमन का कानून बनाने की राज्यों की शक्ति अबाधित एवं पूर्ण: उप्र एवं बंगाल सरकार
सुरेश माधव
- 03 Apr 2024, 09:16 PM
- Updated: 09:16 PM
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-नीत उत्तर प्रदेश सरकार और तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल सरकार उच्चतम न्यायालय में बुधवार को इस बात को लेकर सहमत दिखीं कि औद्योगिक शराब को विनियमित करने के लिए कानून बनाने की राज्यों की शक्ति अबाधित और पूर्ण है।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली नौ-सदस्यीय संविधान पीठ औद्योगिक शराब के उत्पादन, विनिर्माण, आपूर्ति और विनियमन में केंद्र और राज्यों की शक्तियों के अतिव्यापी मुद्दे की सुनवाई कर रही है।
संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति अभय एस. ओका, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल हैं।
वर्ष 1997 में सात-सदस्यीय संविधान पीठ के राज्यों के विरुद्ध फैसला सुनाए जाने के बाद शीर्ष अदालत के समक्ष बड़ी संख्या में याचिकाएं दायर की गयी थीं और 2010 में यह मामला नौ-सदस्यीय संविधान पीठ के सुपुर्द कर दिया गया था।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी ने संविधान पीठ से कहा कि कि ‘‘शराब’’ हमेशा राज्यों के विधायी क्षेत्राधिकार में रही है और केंद्र के पास औद्योगिक शराब के संबंध में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक शराब सहित आबकारी, शराब और स्पिरिट हमेशा राज्य के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा रहे हैं।
द्विवेदी ने पीठ से कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951 की धारा 18जी के तहत औद्योगिक शराब को विनियमित करने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है, इसलिए संघर्ष या कब्जा का मामला नहीं बन सकता। यह क्षेत्र अनधिकृत है और औद्योगिक शराब को विनियमित करने के लिए कानून बनाने की राज्यों की शक्ति अबाधित और पूर्ण है।’’
उन्होंने कहा कि राज्यों के विशेष क्षेत्राधिकार को संसदीय कानून पर निर्भर नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि यह देश के संघीय ढांचे के मूल सार के खिलाफ होगा।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने कहा कि अल्कोहल वाले सभी तरल पदार्थ नशीली शराब की श्रेणी के होते हैं और सातवीं अनुसूची की सूची-दो की प्रविष्टि-आठ के अंतर्गत आते हैं, जिसके अंतर्गत शीरा से तैयार होने वाले सभी प्रकार की स्पिरिट को नियंत्रित एवं विनियमित करने का विशेष क्षेत्राधिकार राज्यों के पास होता है।
गुप्ता ने जोर देकर कहा, "संपूर्ण नियंत्रण राज्य के पास होना चाहिए।"
मामले की सुनवाई अधूरी रही और यह कल जारी रहेगी।
भाषा सुरेश