अदालत की अवमानना के आरोप में श्रीनगर के एसएसपी के खिलाफ मामला दर्ज
नरेश
- 14 Jul 2026, 04:32 PM
- Updated: 04:32 PM
श्रीनगर, 14 जुलाई (भाषा) श्रीनगर की एक स्थानीय अदालत ने एक आपराधिक मामले में अपने कई आदेशों की कथित तौर पर अवहेलना कर अदालत के प्राधिकार को कमतर करने के आरोप में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
अदालत ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी पर बार-बार कोई जवाब न देने , कर्तव्य में चूक करने, वारंट का पालन नहीं करने और सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट तरुण महाजन ने अपने आदेश में कहा, ''यह अदालत पुलिस अधिनियम की धारा 24, जिसे धारा 29 के साथ पढ़ा जाए, उसके तहत अपराध का न्यायिक संज्ञान लेते हुए तथा स्वत: संज्ञान के आधार पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 210 (1) (सी) के तहत श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. जी. वी. संदीप चक्रवर्ती, आईपीएस के खिलाफ मामला दर्ज करती है।''
अदालत ने कहा, '' यह स्पष्ट है कि श्रीनगर के एसएसपी (चक्रवर्ती) को इस अदालत द्वारा जारी वारंट को लंबित रखने की आदत है। उन्होंने एक नहीं, बल्कि तीन बार इस अदालत के आदेशों की अवहेलना की है। इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने अदालत के प्राधिकार को कमजोर किया है और विभिन्न मामलों में उन्हें सौंपे गए आदेशों एवं वारंटों का पालन कराने के अपने दायित्व का प्रथम दृष्टया निर्वहन नहीं किया।''
अदालत ने कहा कि श्रीनगर के एसएसपी के असहयोग के कारण उसे पहले उनके खिलाफ ही कार्रवाई करने के लिए विवश होना पड़ा क्योंकि प्रथम दृष्टया वह पुलिस अधिनियम, 1961 की धारा 24 के तहत अपराध के दोषी प्रतीत होते हैं।
अदालत ने घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए कहा कि उसने इस वर्ष फरवरी में बांदीपोरा के थाना प्रभारी (एसएचओ) को आरोपी एजाज अहमद लोन को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था।
दो मार्च को अगली सुनवाई के दौरान न तो वारंट का पालन किया गया और न ही कोई रिपोर्ट अदालत में पेश की गई। इसके बाद अदालत ने एसएचओ, बांदीपोरा को फिर से वारंट का पालन कराने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि यदि वारंट का पालन नहीं किया जाता है तो एसएचओ, बांदीपोरा 17 अप्रैल को अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहें।
अदालत ने कहा, ''17 अप्रैल को भी न तो वारंट का पालन किया गया, न कोई रिपोर्ट पेश की गई और न ही एसएचओ, बांदीपोरा व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने मौखिक या लिखित रूप से कोई छूट भी नहीं मांगी।''
अदालत ने कहा कि 30 जून को भी एसडीपीओ, बांदीपोरा और एसएसपी, श्रीनगर अपने-अपने जिम्मे सौंपे गए वारंटों का पालन कराने में विफल रहे।
अदालत ने टिप्पणी की, ''उपरोक्त घटनाक्रम से प्रतीत होता है कि श्रीनगर और बांदीपोरा जिलों का पूरा पुलिस तंत्र ध्वस्त हो गया है। अदालत इस बात से आश्चर्यचकित है कि एसएचओ-बांदीपोरा के खिलाफ जारी वारंट का अब तक न तो एसएसपी-बांदीपोरा और न ही एसएसपी-श्रीनगर द्वारा पालन क्यों नहीं कराया गया।''
इस मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी।
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