'इंडिया कानून' ने 'राइट टू बी फॉरगॉटन' पर फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की
सुरेश
- 14 Jul 2026, 04:35 PM
- Updated: 04:35 PM
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) कानूनी डेटाबेस मंच 'इंडिया कानून' ने किसी व्यक्ति के ''राइट टू बी फॉरगॉटन'' (रिकॉर्ड हटाने के अधिकार) को मान्यता देने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है, जिसमें मंच को कुछ अदालती आदेशों के संबंध में उसके ''नाम-आधारित सर्च सुविधा'' को 'डी-इंडेक्स' करने और निष्क्रिय करने का निर्देश दिया गया था।
'आईकानून सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड' की ओर से पेश वकील ने मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष कहा कि मामले में एक वरिष्ठ वकील पैरवी करेंगे और उन्होंने अनुरोध किया कि एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर 21 जुलाई को सुनवाई की जाए।
पीठ ने आदेश दिया, ''इसे 21 जुलाई के लिए सूचीबद्ध करें।''
राष्ट्रीय राजधानी की जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र या वित्तीय सीमा को दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने के पक्ष में लिये गए दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ के फैसले के मद्देनजर वकील मंगलवार को काम से दूर रहे।
अपनी अपील में 'इंडिया कानून' ने कहा कि एकल न्यायाधीश की 29 मई की व्यवस्था में दिए गए निर्देश ''सामान्य प्रकृति के और अस्पष्ट'' हैं तथा ये सूचना के अधिकार और खुली न्याय व्यवस्था के उद्देश्यों के प्रतिकूल हैं।
याचिका में कहा गया है कि इस फैसले ने 'सेंसरशिप' का दायरा बढ़ा दिया है तथा नाम आधारित 'सर्च' को 'डी-इंडेक्स' करने अर्थात सर्च इंजन के खोज परिणामों से हटाने के लिए मनमाना मानक निर्धारित किया है, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत मंच के व्यापार, व्यवसाय और पेशे की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
'डी-इंडेक्सिंग' का तात्पर्य किसी विशिष्ट वेब पेज या लिंक को सर्च इंजन के डेटाबेस से हटाना है।
याचिका में दावा किया गया है कि एकल न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा ''के. एस. पुट्टास्वामी'' मामले में 'निजता के अधिकार' संबंधी फैसले की गलत व्याख्या की।
याचिका में कहा गया है कि ऐतिहासिक फैसले में शीर्ष अदालत ने इस अवधारणा पर चर्चा की थी, लेकिन न्यायिक अभिलेखों से पूरी तरह से मिटा दिए जाने का कोई असीमित अधिकार प्रदान नहीं किया था।
'इंडिया कानून' एक नि:शुल्क कानूनी डेटाबेस है, जो आम लोगों को कानून से संबंधित जानकारियों तक सुलभ पहुंच प्रदान बनाता है। इसमें उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय और अधीनस्थ अदालतों के फैसले और आदेश जैसे सार्वजनिक न्यायिक रिकॉर्ड मौजूद होते हैं।
याचिका में कहा गया है कि यह मंच व्यापक जनहित का काम करता है और किसी व्यक्ति की अपनी न्यायिक कार्यवाही के इतिहास को मिटाने की इच्छा, बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अन्य मौलिक अधिकारों पर रोक लगाने का आधार नहीं बन सकती।
इस बीच, जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र में प्रस्तावित बदलाव का विरोध करते हुए यहां के वकील मंगलवार को काम से दूर रहे।
वर्तमान में दिल्ली उच्च न्यायालय दो करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के दीवानी और वाणिज्यिक मामलों की सुनवाई करता है, लेकिन प्रस्तावित बदलाव के बाद जिला अदालतें 10 करोड़ रुपये तक मूल्य वाले मुकदमों की सुनवाई कर सकेंगी।
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने वकालत के पेशे, आजीविका और पेशेवर हितों पर असर पड़ने का हवाला देते हुए इस कदम का विरोध किया है।
भाषा सुरभि सुरेश
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