सरकार छात्रों के प्रति इतनी निर्दय कैसे हो सकती है, वे भारतीय हैं पाकिस्तानी नहीं: दीपके के पिता
नेत्रपाल
- 18 Jul 2026, 06:17 PM
- Updated: 06:17 PM
छत्रपति संभाजीनगर, 18 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता भगवान दीपके ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे अपने बेटे को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने सवाल किया कि सरकार भारत के ही नागरिक छात्रों के प्रति इतनी ''निर्दय'' कैसे हो सकती है।
उन्होंने कहा कि वे पाकिस्तानी नहीं हैं।
भगवान दीपके ने दावा किया कि देश के कई हिस्सों में छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार किसी की मौत का इंतजार कर रही है।
भगवान दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की मांगों को नहीं सुन रही।
उन्होंने कहा कि वह अपने बेटे के अनिश्चितकालीन अनशन में शामिल हो सकते हैं।
शनिवार सुबह दिल्ली के जंतर-मंतर पर उस समय हलचल मच गई, जब नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में जवाबदेही की मांग को लेकर पिछले 20 दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल भेज दिया।
पुलिस की इस कार्रवाई के कुछ ही समय बाद अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।
छत्रपति संभाजीनगर में एक मराठी समाचार चैनल से बातचीत के दौरान भगवान दीपके ने अपने बेटे के अनशन को लेकर चिंता जताई।
भगवान दीपके ने कहा, ''एक पिता के रूप में मुझे अभिजीत की चिंता है। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि सत्तासीन नरेन्द्र मोदी को सद्बुद्धि मिले, ताकि बेहतर समझ पैदा हो और सरकार आंदोलन कर रहे छात्रों की बात सुने। देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र भूख हड़ताल पर हैं।"
उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, "क्या सरकार किसी के मरने का इंतजार कर रही है? उनके लिए कितने लोगों को मरना होगा? उनमें कोई दया नहीं है। अगर वह इंसान हैं तो उन्हें छात्रों की बात सुननी चाहिए।''
उन्होंने कहा कि अगर सरकार छात्रों की बात नहीं सुनती, तो ''हम भी दिल्ली में आंदोलन स्थल पर जाएंगे और भूख हड़ताल शुरू करेंगे।''
छात्रों की मांगों के प्रति कथित उदासीनता को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रदर्शनकारी छात्र पाकिस्तानी हैं?
भगवान दीपके ने कहा, ''क्या ये (प्रदर्शन कर रहे) छात्र पाकिस्तान या किसी दूसरे देश से हैं? वे भारतीय हैं। इस व्यक्ति को इतनी निर्दयता से व्यवहार नहीं करना चाहिए। मेरा कोई रिश्तेदार या मेरे समुदाय का कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसने अभी नीट परीक्षा दी हो।''
अभिजीत की मां ने कहा कि सरकार को वांगचुक के बारे में फैसला 20 जुलाई के बाद लेना चाहिए था, जब आंदोलन को एक महीना पूरा हो जाता।
उन्होंने कहा, ''दिल्ली में यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी था। सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद अभिजीत ने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया है। हमें उसकी चिंता है। हमारी तीन दिन पहले अभिजीत से फोन पर आखिरी बार बात हुई थी। सरकार को 20 जुलाई के बाद फैसला लेना चाहिए था।''
उन्होंने कहा कि केवल सरकार ही जानती है कि इस आंदोलन को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा।
वांगचुक का अनशन रोककर उन्हें अस्पताल भेजने के पुलिस के कदम की विपक्षी दलों ने व्यापक आलोचना की। वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। वह राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉजपा के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के समर्थन में अनशन कर रहे थे।
पिछले तीन हफ्ते में उनकी सेहत लगातार खराब होती गई थी। शुक्रवार को चिकित्सकों ने बताया था कि अनशन शुरू होने के बाद से वांगचुक का वजन करीब 9.5 किलोग्राम कम हो गया है। उनके रक्तचाप और रक्त शर्करा स्तर पर लगातार नजर रखी गई।
शुक्रवार रात वांगचुक ने कहा था कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद वह अनशन जारी रखने के फैसले पर कायम हैं। उन्होंने दावा किया था कि 20 दिन की भूख हड़ताल के दौरान उन्होंने ''अपने शरीर का 20 प्रतिशत हिस्सा खो दिया है।''
भाषा जोहेब नेत्रपाल
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