हमारी सेवा 'डिस्पेंसरी' की तरह, खामियों की जांच के लिए हर दल का स्वागत: प्रदीप गुप्ता
पवनेश
- 23 May 2026, 07:01 PM
- Updated: 07:01 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों के नतीजों का सटीक अनुमान लगाने में मिली सफलता से उत्साहित चुनाव विश्लेषक एवं सर्वेक्षण एजेंसी 'एक्सिस माई इंडिया' के प्रमुख प्रदीप गुप्ता का कहना है कि उनकी सेवा "डिस्पेंसरी" की तरह है, जहां अपनी खामियों की पहचान के लिए जांच करवाने के वास्ते सभी राजनीतिक दलों का स्वागत है।
गुप्ता ने 'पीटीआई-भाषा' के साथ साक्षात्कार में कहा, "मुझे बस पार्टी को अपने एमआरआई स्कैनर से गुजारना है।" उन्होंने संकेत दिया कि वह 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए प्रचंड बहुमत का अनुमान लगाने की विफलता से उबर चुके हैं।
गुप्ता ने कहा कि कई राजनीतिक दल सर्वेक्षण कार्य के लिए पहले ही 'एक्सिस माई इंडिया' की सेवाएं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि एजेंसी की सेवाएं लेने के लिए सभी पार्टियों का स्वागत है।
गुप्ता ने कहा, "कई बार आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन मैं कहता हूं कि मेरी एजेंसी एक 'डिस्पेंसरी' की तरह है। जो भी हमारे पास आता है, हम उसे अपने 'स्कैनर' से गुजारते हैं और बताते हैं कि उसमें कहां विटामिन-सी, कहां विटामिन-डी और कहां विटामिन-ई की कमी है। अगर वह उसके हिसाब से 'दवाइयां' लेता है और सुधारात्मक उपाय अपनाता है, तो उसे सफलता मिलती है।"
उन्होंने कहा, "कोई भी आ सकता है। मैं पूरा भुगतान चेक के माध्यम से लेता हूं। इसमें कोई समस्या नहीं है।"
गुप्ता ने कहा कि 'एक्सिस माई इंडिया' के पास अब इतना काम है कि उसकी "मुश्किल" ग्राहक बनाना नहीं, बल्कि क्रियान्वयन है।
उन्होंने कहा कि एजेंसी कई बड़ी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के साथ भी काम करती है, जिनमें यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ-साथ तपेदिक उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं।
गुप्ता ने कहा कि सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण 'एक्सिस माई इंडिया' के लिए एक सतत कार्यक्षेत्र बना हुआ है और एजेंसी अब एक बड़ी जन-सशक्तीकरण पहल शुरू करने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने कहा कि 'एक्सिस माई इंडिया' ने देश के लगभग 4,120 विधानसभा क्षेत्रों में "उपाय केंद्र" स्थापित करके एक "जन-सशक्तीकरण मंच" तैयार करने का फैसला लिया है।
गुप्ता ने कहा कि इस पहल का मकसद प्रौद्योगिकी को जमीनी स्तर की कार्रवाई के साथ जोड़ना है।
उन्होंने कहा, "आजकल सब कुछ प्रौद्योगिकी आधारित है, लेकिन प्रौद्योगिकी के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी कुछ ऐसा होना चाहिए, जिससे उसे परिणामों में बदला जा सके।"
गुप्ता ने कहा, "जनता से जुड़े सभी मुद्दों पर हम 'उपाय केंद्रों' के माध्यम से जानकारी पर आधारित कार्रवाई करेंगे।"
उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य देश के सभी परिवारों की समस्याओं को आपस में जोड़ना और उनका समाधान करना है। हमारा मिशन हर दिन सक्रिय रूप से काम करना और एक गांव के कायाकल्प में योगदान देना है।"
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने कभी प्रशांत किशोर की तरह राजनीतिक सलाहकार बनने या खुद राजनीति की दुनिया में कदम रखने के बारे में सोचा है तो गुप्ता ने कहा कि राजनीति "उनके स्वभाव में कहीं भी नहीं है।"
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि सर्वेक्षण राजनीति से अलग है। हम जो करते हैं, वह चुनावी विश्लेषण है, जो मनोविज्ञान और समाजशास्त्र का मिश्रण है। हम लोगों की जरूरतों को समझने की कोशिश करते हैं, क्योंकि मानव जाति की निर्णय लेने की प्रक्रिया जरूरतों पर आधारित होती है।"
गुप्ता ने कहा, "जहां तक राजनीति की बात है, अगर मैं चुनाव लड़ता हूं, तो शायद मेरे परिवार के सदस्य भी मुझे वोट न दें।"
भाषा पारुल पवनेश
पवनेश
2305 1901 दिल्ली