मप्र में वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को कांग्रेस नेताओं ने बताया अनुचित, भाजपा ने किया स्वागत
राजकुमार
- 06 Jul 2026, 09:55 PM
- Updated: 09:55 PM
भोपाल, छह जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश में वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर दो हिन्दू सदस्यों को शामिल किए जाने को सोमवार को कांग्रेस की प्रदेश इकाई के दो वरिष्ठ नेताओं ने 'अनुचित' करार देते हुए हुए कहा कि वे इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने सरकार के कदम पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि इसे धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि वक्फ बोर्ड केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को राज्य में वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए दो हिन्दू सदस्यों को इसमें शामिल किया था।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के तहत गठित यह नया बोर्ड देश का पहला ऐसा राज्य स्तरीय वक्फ बोर्ड है, जिसमें हिन्दू सदस्यों की नियुक्ति की गई है।
सनवर पटेल को दस सदस्यीय मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। इस बोर्ड में हिन्दू सदस्य के रूप में मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव को भी शामिल किया गया है।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने यहां संवाददाताओं से कहा कि वक्फ अधिनियम से जुड़ा मामला पहले से ही उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।
उन्होंने कहा कि जब तक शीर्ष अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक इस तरह की नियुक्तियां नहीं की जानी चाहिए थीं।
उन्होंने कहा कि ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड का पुर्नगठन किया जाना और उसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनुचित है, यह कई तरह के कानूनी सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा, ''हम इस पूरे मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और वक्फ बोर्ड के गठन तथा सदस्यों की नियुक्ति को चुनौती देंगे।''
पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी सी शर्मा ने 'पीटीआई-वीडियो' से बातचीत में वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति के लिए भाजपा पर पर साधा निशाना और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी के पास 'हिंदू-मुस्लिम' और 'हिंदुस्तान-पाकिस्तान' के अलावा कोई और मुद्दा नहीं है।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में चढ़ावा चोरी और मुख्यमंत्री यादव के खिलाफ लगे आरोपों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह कदम उठाया है।
राज्य सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि वक्फ कानून 2026 लागू कर और उसमें दो हिन्दू सदस्यों का शामिल करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है।
उन्होंने मुख्यमंत्री यादव और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को बधाई देते हुए कहा कि इसके बहुत दूरगामी एवं अच्छे परिणाम निकलने वाले हैं।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं की आपत्ति पर कहा, ''यह मस्जिद कमेटी में किसी गैर मुस्लिम को शामिल करने वाली बात नहीं है, वक्फ बोर्ड अलग है। इसे धर्म के चश्मे से देखना आश्चर्य की बात है। वक्फ बोर्ड केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है, इसका दायरा बहुत बड़ा है।''
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि यह तो अच्छी बात है, बुरा उनको लगना चाहिए जो वक्फ की जमीनों पर कब्जा जमाए बैठे हैं।
उन्होंने कहा, ''वक्फ बोर्ड की जमीन तो हिंदुस्तान की है और सब लोग गंगा-जमुनी तहजीब की बात करते हैं। यह देश की संस्कृति में है। वह गरीबों को दी जाने वाली भूमि है। वक्फ की जमीन किसी मुल्ला और मौलवी के नाम नहीं की गई है।''
उन्होंने कहा कि वक्फ के हिंदू सदस्यों का दृष्टिकोण भी गरीबों का भला करने के लिए होगा।
उन्होंने कहा, ''इसमें मुसलमानों को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए, उनको तकलीफ जरूर होगी, जो वक्फ की संपत्ति को खा रहे थे।''
वक्फ बोर्ड राज्य की वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण के लिए गठित एक वैधानिक संस्था है। इसका मुख्य कार्य वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करना, उनके उपयोग और आय की निगरानी करना, अवैध कब्जों से सुरक्षा देना तथा धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक कल्याण के उद्देश्यों के लिए इन संपत्तियों के उपयोग को सुनिश्चित करना है।
भाषा ब्रजेन्द्र
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